चार महीने बीत गए हैं, और एक आदमी का कोई पता नहीं है। यह सिर्फ एक
गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि पुलिस सिस्टम की बेपरवाही और लापरवाही को
भी दिखाता है।
- रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने हार मान ली
बबुरी/चंदौली: चार महीने बीत गए हैं, और एक आदमी का कोई पता नहीं है। यह सिर्फ एक गुमशुदगी Disappearance का मामला नहीं है, बल्कि पुलिस सिस्टम की बेपरवाही और लापरवाही को भी दिखाता है। Baburi के कपड़ा कारोबारी रोहित केशरी का गायब होना अब एक गंभीर क्रिमिनल केस से ज़्यादा पुलिस की निष्क्रियता की कहानी बन गया है। 27 सितंबर, 2025 से Missing Rohit का नाम पुलिस रिपोर्ट Police Report में तो है, लेकिन असल में, वह पुलिस की प्राथमिकताओं से गायब हो गया लगता है।
परिवार को शुरू से ही किडनैपिंग Kidnapping का शक था। यह कोई आम गुमशुदगी का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा है जिसकी तुरंत, टेक्निकल और पूरी जांच की ज़रूरत है। इसके बावजूद, न तो थाने और न ही ज़िले के थाना इंचार्ज व अधिकारियों ने इस बारे में कोई जवाब दिया है कि पुलिस चार महीने से क्या कर रही थी। जांच के नाम पर सिर्फ़ तारीखें बढ़ाई गईं, फाइलें बदली गईं और परिवार को हर बार नए-नए भरोसे दिए गए। थाने में अफ़सरों के बदलने से उम्मीद जगी है कि केस को गंभीरता से लिया जाएगा।
लेकिन, अफ़सरों के चेहरे तो बदले हैं, लेकिन उनके तेवर नहीं बदले। समन की डिटेल्स पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, संभावित ठिकानों पर कोई बड़ी छापेमारी नहीं हुई, और कोई ठोस सुराग नहीं मिला—ये सब बताते हैं कि पुलिस ने समय रहते इस केस को प्राथमिकता नहीं दी। सबसे दर्दनाक हालत रोहित केशरी की पत्नी पूजा की है, जो पिछले चार महीने से इंसाफ़ के लिए लड़ रही है। थाने, अफ़सरों और समाज के नुमाइंदों के पास अर्ज़ी दी गई है। राज्यसभा सांसद Rajya Sabha MP से लेकर मुगलसराय विधायक Mughalsarai MLA तक सबके साथ मीटिंग की गई, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
भरोसे की लंबी लिस्ट है, लेकिन ठोस कार्रवाई का एक भी मामला नहीं। शहर के लोग अब खुलेआम पूछ रहे हैं कि क्या पुलिस गुमशुदगी जैसे गंभीर मामलों को सिर्फ़ कागज़ बताकर टाल रही है। क्या सिस्टम में एक आम बिज़नेसमैन का गायब होना कोई छोटी बात है? अगर चार महीने बाद भी कोई दिशा नहीं मिली है, तो यह सीधे तौर पर पुलिस की परफॉर्मेंस पर सवाल उठाता है।
अगर इस केस में जल्द ही कोई ठोस प्रोग्रेस नहीं हुई, तो रोहित केशरी का गायब होना पुलिस की फाइल पर सिर्फ एक और फाइल नहीं, बल्कि पब्लिक के भरोसे पर एक और काला धब्बा बन जाएगा। अब सवाल यह नहीं है कि रोहित कहां है, बल्कि यह है कि पुलिस आखिर कब एक्शन लेगी, और उसकी बेबस पत्नी और परिवार को कब इंसाफ मिलेगा? या यह केस भी पुलिस रिपोर्ट Police Report के पन्नों में ही दबा रहेगा?
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