PM Awas Yojana Gramin Survey: देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण दिखी है जो अभी भी मिट्टी के घरों या खराब हालत वाले घरों में रहने को मजबूर हैं। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना प्रोग्राम के ग्रामीण हिस्से के तहत एक बड़ा सर्वे शुरू किया है।
यह सर्वे जनवरी 2025 से देश भर के गांवों में चल रहा है, और इसका मुख्य मकसद उन सभी जरूरतमंद परिवारों की पहचान करना है जिन्हें तुरंत घर की ज़रूरत है। सरकार ने आने वाले महीनों में सभी योग्य परिवारों की एक लिस्ट बनाने का फैसला किया है ताकि उन्हें जल्द से जल्द घर का सपना पूरा करने में मदद मिल सके।
इस प्रोग्राम के तहत कितनी फाइनेंशियल मदद मिलती है?
यह बड़ा प्रोग्राम योग्य ग्रामीण परिवारों को अपना घर बनाने के लिए 120,000 रुपये तक की फाइनेंशियल मदद देता है। यह रकम सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में किश्तों में ट्रांसफर की जाती है।
इस रकम से कोई भी परिवार अपनी ज़मीन पर एक मज़बूत और टिकाऊ घर बना सकता है। पहले भी, लाखों गरीब परिवारों को इस प्रोग्राम से फ़ायदा हुआ है और उनके सिर पर पक्की छत रही है। अब, एक नए सर्वे के ज़रिए, इस प्रोग्राम में और भी परिवारों को शामिल करने का प्लान बनाया जा रहा है।
सर्वे पूरा होने के बाद क्या होगा?
जैसे-जैसे ग्रामीण इलाकों में सर्वे अपने आखिरी फ़ेज़ के पास पहुँचेगा, सरकारी डिपार्टमेंट एलिजिबल बेनिफिशियरीज़ की एक नई, अपडेटेड लिस्ट तैयार करेगा। इस लिस्ट में उन सभी परिवारों के नाम शामिल होंगे जो असल में प्रोग्राम के लिए क्वालिफ़ाई करते हैं।
जिन परिवारों के नाम इस लिस्ट में होंगे, उन्हें घर बनाने के लिए ज़रूरी पैसे सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलेंगे। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, बेघर लोगों और असुरक्षित या खतरनाक घरों में रहने वाले परिवारों को प्रायोरिटी दी जाएगी।
सर्वे दो तरीकों से किया जा रहा है
यह पक्का करने के लिए कि कोई भी एलिजिबल परिवार प्रोग्राम से छूट न जाए, सरकार दो अलग-अलग तरीकों से सर्वे प्रोसेस कर रही है। पहला तरीका ऑनलाइन है, जिसमें आवास प्लस नाम के एक खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाता है। इस ऐप के ज़रिए, ग्रामीण इलाकों के परिवार खुद अपनी जानकारी और डेटा डाल सकते हैं। दूसरा तरीका पारंपरिक, ऑफ़लाइन तरीका है, जिसमें गांव के सेक्रेटरी, पंचायत प्रतिनिधि और सरकार की तरफ़ से बनाई गई स्पेशल रिसर्च टीमें हर गांव में जाकर, घर-घर जाकर परिवारों से ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करती हैं।
एप्लीकेशन प्रोसेस को समझना
जो परिवार इस प्रोग्राम का फ़ायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें तय प्रोसेस के हिसाब से अप्लाई करना होगा। यह ज़रूरी है कि सारी जानकारी सही और असली हो। गलत या अधूरी जानकारी होने पर एप्लीकेशन रिजेक्ट हो सकती है। एप्लीकेशन के साथ सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स की कॉपी भी अटैच करनी होंगी। पहले, देश में लाखों गरीब परिवारों ने इसी प्रोसेस से अपने घर बनाए थे, और अब, नए सर्वे से, उम्मीद है कि इस प्रोग्राम से और भी कई परिवारों को फ़ायदा होगा।
किस परिवार को प्राथमिकता दी जाएगी
यह प्रोग्राम मुख्य रूप से आर्थिक रूप से सबसे कमज़ोर परिवारों को टारगेट करेगा। जिनके पास पक्का घर नहीं है या जो बहुत पुराने और टूटे-फूटे घरों में रहते हैं, उन्हें सबसे पहले मदद मिलेगी। विधवा महिलाओं, दिव्यांग लोगों और रजिस्टर्ड जाति और जनजाति के परिवारों पर भी इस प्रोग्राम में खास ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि समाज के निचले पायदान पर मौजूद इन परिवारों को सबसे पहले बेसिक सर्विस मिलनी चाहिए।
प्रोग्राम का सामाजिक महत्व
प्रधानमंत्री आवास योजना सिर्फ़ एक सरकारी प्रोग्राम नहीं है, बल्कि समाज में बराबरी और सम्मान कायम करने का एक ज़रिया है। जब किसी परिवार का अपना घर होता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह समाज में इज्ज़तदार ज़िंदगी जी पाता है। बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिलता है और परिवार की औरतें सुरक्षित महसूस करती हैं। यह प्रोग्राम सिर्फ़ ईंट के घर ही नहीं देता, बल्कि लोगों को बेहतर ज़िंदगी जीने का मौका भी देता है।

