भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) और इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) के कार्यकर्ताओं ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर पैदल मार्च निकाला।
बोले - देश की नौकरशाही भ्रष्टाचार में लिप्त
चहनियाँ/चंदौली : कस्बा में सोमवार की शाम को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) और इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) के कार्यकर्ताओं ने शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर पैदल मार्च निकाला।
कार्यकर्ताओं ने 'साम्राज्यवाद मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए पूरे कस्बे का भ्रमण किया। यह जुलूस शहीद भगत सिंह चौक पर समाप्त हुआ, जहां भगत सिंह के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद एक सभा का आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए इंकलाबी नौजवान सभा के जिलाध्यक्ष कॉमरेड अनिल यादव ने कहा कि आज देश में नौकरशाही भ्रष्टाचार में लिप्त है,जबकि अरबपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आरोप लगाया कि देश एक ऐसे पूंजीवादी व्यवस्था के कुचक्र में फंस गया है, जिसकी आशंका भगत सिंह ने आजादी से पहले अपनी मां को लिखे एक पत्र में व्यक्त की थी।
कॉमरेड यादव ने भगत सिंह के विचारों को आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक बताया। कहा कि भगत सिंह ने आशंका जताई थी कि आजादी के बाद गोरे अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेज ले लेंगे और आम जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी, बल्कि कठपुतली सरकारें काम करेंगी। आज जब भ्रष्टाचार और असमानता से त्रस्त समाज बेहतर व्यवस्था की तलाश कर रहा है, तब भगत सिंह का संदेश न्याय, समानता और मानव गरिमा के महत्व को याद दिलाता है।
अमेरिका और इजरायल के गठबंधन पर भी सवाल उठाए, आरोप लगाया कि यह गठबंधन दुनिया भर में युद्ध थोपने की साजिश कर रहा है, जिससे भारत भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि को इसी का परिणाम बताया और चेतावनी दी कि यदि भारत अमेरिका की गुलामी करेगा तो देश में आर्थिक संकट आ सकता है। पार्टी ने घोषणा की कि यह युद्ध विरोधी और साम्राज्य विरोधी अभियान 31 मार्च तक क्षेत्र के कस्बों और गांवों में कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के नेतृत्व में जारी रहेगा।
इस अवसर पर किसान नेता कॉमरेड हरिशंकर विश्वकर्मा, हरिनारायण मौर्य, राजेश कुशवाहा, अमित यादव, कॉमरेड इंद्रजीत कुशवाहा, संदीप यादव, सुजीत कुमार मौर्य, पंचम, ओमप्रकाश, गायत्री, जगदीश, अर्जुन, चंद्रबली, सीताराम बनबसी सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।

