मुशायरे में गजल और स्वरचित काव्य पेश कर लूटी वाहवाही

मुशायरे में गजल और स्वरचित काव्य पेश कर लूटी वाहवाही

शहर के गूलर नाका स्थित मंसूरी इमाम बाड़े में गुरुवार की रात मुशायरे का आयोजन हुआ , जिसमें शायरों ने गजल और कवियों ने स्वरचित काव्य का प्रस्तुतीकरण कर सबको आकर्षित किया।

मुशायरे में गजल और स्वरचित काव्य पेश कर लूटी वाहवाही

  • शहर के गूलर नाका स्थित मंसूरी इमाम बाड़े में गुरुवार की रात मुशायरे का आयोजन हुआ   
  ललित विश्वकर्मा/ वरिष्ठ संवाददाता / बाँदा। शहर के गूलर नाका स्थित मंसूरी इमाम बाड़े में गुरुवार की रात मुशायरे का आयोजन हुआ जिसमें शायरों ने गजल और कवियों ने स्वरचित काव्य का प्रस्तुतीकरण कर सबको आकर्षित किया। इन सभी के प्रस्तुतीकरण ने जमकर वाहवाही लूटी। 

कार्यक्रम में अफ़ज़ल इलाहाबादी के साथ बाँदा के कवियों और शायरों ने गज़लें और कविताएं पेश की। अवनी परिधि हॉस्पिटल की निर्देशिका डा नीलम सिंह, एम एस गायनी गोल्ड मेडलिस्ट, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लाखन सिंह रहे और कविताएं पढ़ीं ।

सबसे पहले अफ़ज़ल इलाहाबादी को अंग वस्त्र पहनकर और समति चिन्ह दे कर संम्मानित किया गया । आयोजक शेख सादीजमा ने आगंतुकों का आभार जताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता शमीम बांदवी ने की।कार्यक्रम की शुरुआत अनवर हमीरपुरी ने नात पढ़ के की इसके बाद युवा कवि अनुराग विश्वकर्मा ने कविता का प्रस्तुतीकरण कर खूब वाहवाही लूटी। अनुराग के बाद तारिक अजीज ने दर्द भरी शायरी पढ़ी, उन्हीं की दोस्तो मुश्किल में जान होती है ।घरों में जिनके भी बेटी जवान होती है। 

इसके बाद अनवर हमीरपुरी ने पढ़ा,किया है अजमे सफर तो मिलेगी मंजिल भी।मुसाफ़िरत से भी मेरी मोहताजे रहबरी तो नहीं।अफ़ज़ल इलाहाबादी ने कई ग़ज़ले पेश की।जलवए यार इन आँखों मे बसा रखा है। हमने कूज़े में समंदर को छुपा रक्खा है। तुझसे ही रंगे तग़ज़्ज़ुल है मेरी ग़ज़लों में, तेरी आँखों ने मुझे मेरे बना रक्खा है । डाक्टर नीलम सिंह ने बेटी के जन्म से लेकर उसके  जीवन गाथा को संबोधित रचना में प्रस्तुत किया। पिरो कर सुनाया उनकी इस कविता को लोगों ने खूब सराहा।

 डिप्टी कलेक्टर इरफान उल्ला खाँ ने ग़ज़ल सुनाई, कहीं नहीं है मेरा ज़िक्र सर फरोशों में।पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लाखन सिंह ने भी कविता सुनाई ।बाँदा के युवा कवि अनिल दिवर्दी ने माँ पर कविता पढ़ी,न मुझसे ये पूछो की क्या मेरी माँ है। जन्नत कहीं गर तो वो मेरी माँ है ।मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे शमीम बांदवी ने ग़ज़ल पेश की।

संचालन नजरे आलम ने किया। इस दौरान सेवानिवृत्त शिक्षक गोपाल गोयल, अहमद मगरिबी, डा शरीफ, फरीद बाबा,जावेद खान , रिज़वान अली, सलमान, अमन यादव आदि मौजूद रहे।


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