मथुरा में CM योगी आदित्यनाथ ने कहा - भारत की पवित्रता की परंपरा ने मुश्किल समय में समाज का मार्गदर्शन किया है और सांस्कृतिक मूल्यों को बचाकर रखा है।
मथुरा। उत्तर प्रदेश के CM Yogi Adityanath ने मंगलवार को कहा कि भारत की पवित्रता की परंपरा ने मुश्किल समय में समाज का मार्गदर्शन किया है और सांस्कृतिक मूल्यों को बचाकर रखा है। Shri Sitaram Nikunj Ashtayam Leela Festival के मौके पर योगी ने पवित्रता की परंपरा, सनातन संस्कृति और भारत की आध्यात्मिक विरासत के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु मूलकदास जी महाराज ने वैष्णव परंपरा से रामानंदी संप्रदाय को अपनाकर लोगों में जागरूकता फैलाई।
Prayagraj का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक पवित्र भूमि है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती तीन नदियां बहती हैं और जहां कुंभ और माघ मेले के दौरान देश-विदेश से लाखों भक्त पवित्र स्नान करने आते हैं। योगी ने कहा कि महाराज मूलकदास जी ने चार मुगल शासकों: अकबर, जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब का दौर देखा और उस समय की चुनौतियों का सामना किया। इसके बावजूद, संतों ने अपने आदर्शों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भारत में संतों की परंपरा ने हमेशा समाज में जागरूकता और आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया है, जो आज भारतीय संस्कृति की नींव है। तुलसीदास का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुगल बादशाह अकबर के लालच के बावजूद, उन्होंने अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया।
श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य श्रीमलूकदास देवाचार्य जी महाराज की 452वीं जयन्ती के अवसर पर मथुरा-वृन्दावन में आयोजित श्रीमलूक जयंती महोत्सव व श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव में... https://t.co/6K2xozV7tf
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 7, 2026
Tulasidas ने साफ कहा था कि उन्हें कोई राजा नहीं पता; उनके लिए सिर्फ भगवान राम ही सबसे ऊपर हैं। यही वजह है कि आज भी रामलीला में "राजा रामचंद्र की जय" का नारा गूंजता है, जो भारतीय आस्था और हमेशा रहने वाली परंपराओं का जीता-जागता प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की एक खासियत यह है कि जहां फिल्में कुछ ही दिनों में भुला दी जाती हैं, वहीं संतों और धार्मिक आयोजनों की कहानियां सदियों तक लोगों को जोड़ती हैं। लाखों भक्त, कहानी की हर डिटेल जानने के बावजूद, घंटों बैठकर उसे सुनते हैं और अपनी ज़िंदगी में अपनाते हैं। मुख्यमंत्री ने यह कहकर बात खत्म की कि संतों की हमेशा रहने वाली परंपराएं और शिक्षाएं ही भारत की असली ताकत हैं, जो देश को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और एकजुट रखती हैं।

