लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 बच्चों और युवाओं की मौत के बाद जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इमारत में फायर एनओसी नहीं थी और निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया था। एलडीए ने जांच समिति गठित कर दी है।
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| AIसे बनाया गया Image |
- दर्दनाक हादसे के बाद सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक इमारत में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 बच्चों और युवाओं की दर्दनाक मौत के बाद अब जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जिस भवन में आग लगी, उसका मानचित्र तो स्वीकृत था, लेकिन निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं किया गया था।
निर्धारित सेटबैक क्षेत्र पर भी किया गया निर्माण
जांच में यह भी सामने आया है कि भवन निर्माण के दौरान निर्धारित सेटबैक क्षेत्र को भी कवर कर लिया गया था। इससे न केवल भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित निकास की संभावना भी प्रभावित हुई। जानकारी के अनुसार, यह मानचित्र धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला के नाम पर स्वीकृत किया गया था।
भवन में नहीं थी फायर एनओसी
हादसे के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इमारत के पास फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) भी नहीं थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बिना फायर सुरक्षा मानकों के पालन के इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन कैसे किया जा रहा था।
PHOTO | At least 15 people, primarily students, were killed and seven others injured after a massive fire swept through a three-storey commercial building in the Aliganj area of north Lucknow on Monday afternoon.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 22, 2026
The blaze broke out in a complex on Usha Mehta Marg that housed an… pic.twitter.com/8WvQsyXnee
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान नहीं होता।
भूतल पर दुकान, ऊपरी मंजिलों पर लाइब्रेरी और आर्ट स्टूडियो
बताया जा रहा है कि इमारत के भूतल पर पालतू पशुओं से संबंधित दुकान संचालित हो रही थी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर थ्री-डी आर्ट स्टूडियो और बच्चों की लाइब्रेरी चलाई जा रही थी। हादसे के समय परिसर में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा मौजूद थे, जिसके कारण जनहानि का आंकड़ा बढ़ गया।
एलडीए ने गठित की जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है। समिति यह जांच करेगी कि भवन निर्माण में किन-किन नियमों का उल्लंघन किया गया, फायर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई और इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी लखनऊ में संचालित व्यावसायिक, कोचिंग और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय-समय पर भवनों का सुरक्षा ऑडिट और फायर जांच होती रहे, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
लखनऊ अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों की कमी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब पूरा प्रदेश यह जानना चाहता है कि आखिर बिना फायर एनओसी और नियमों के उल्लंघन के बावजूद इस भवन का संचालन कैसे होता रहा। जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

