LIC का पोर्टफोलियो कितना बड़ा है? क्या वे NSE IPO में अपने शेयर बेचेंगे? मैनेजमेंट के साथ अनिल सिंघवी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

LIC का पोर्टफोलियो कितना बड़ा है? क्या वे NSE IPO में अपने शेयर बेचेंगे? मैनेजमेंट के साथ अनिल सिंघवी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

LIC के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, आर. दोराईस्वामी ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया कि कंपनी गिरावट पर खरीदने और तेज़ी पर प्रॉफ़िट लेने की स्ट्रैटेजी अपनाती है। LIC का टोटल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो ₹57 लाख करोड़ से ज़्यादा है। NSE IPO के बारे में उन्होंने कहा कि लिस्टिंग से LIC के पोर्टफोलियो में NSE होल्डिंग्स की असली मार्केट वैल्यू पता चलेगी। कहा 

LIC का पोर्टफोलियो कितना बड़ा है? क्या वे NSE IPO में अपने शेयर बेचेंगे? मैनेजमेंट के साथ अनिल सिंघवी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

Zee बिज़नेस ने देश की लीडिंग इंश्योरेंस कंपनी, लाइफ़ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (LIC) के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर के साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत की। ज़ी बिज़नेस के मैनेजिंग एडिटर, अनिल सिंघवी ने लाइफ़ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, आर. दोराईस्वामी से एक्सक्लूसिव बात की। यह उनका पहली बार हिंदी में यह इंटरव्यू था। बातचीत के दौरान, कंपनी की ग्रोथ से जुड़े कई सवालों पर चर्चा हुई। लेकिन, मुख्य सवाल ये थे: LIC का पोर्टफोलियो कितना बड़ा है और स्टॉक मार्केट के लिए उसके क्या प्लान हैं?

अनिल सिंघवी ने LIC के बड़े इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो पर सवाल उठाया, जिसमें इक्विटी और डेट दोनों शामिल हैं। LIC को मार्केट मूवर माना जाता है, लेकिन पिछले दो सालों में इसने मार्केट में कोई खास प्रॉफिट नहीं कमाया है। अनिल सिंघवी ने पूछा कि मार्केट के लिए कंपनी का मौजूदा अप्रोच क्या है।

LIC का मार्केट और पोर्टफोलियो अप्रोच
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, आर. दोराईस्वामी ने कहा कि LIC पॉलिसीहोल्डर्स को अच्छा रिटर्न देने के लिए तब खरीदती है जब मार्केट नीचे होता है ("गिरावट पर खरीदें") और तब प्रॉफिट कमाती है जब मार्केट ऊपर होता है ("बढ़त पर बेचें")।

उन्होंने आगे कहा कि LIC का कुल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो ₹57 लाख करोड़ से ज़्यादा है (तुलना के लिए: पूरी इंडियन म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का साइज़ लगभग ₹85 लाख करोड़ है)। हालांकि, कंपनी की प्रायोरिटी पॉलिसीहोल्डर्स के पैसे को सुरक्षित रखना और अपने प्रोडक्ट्स पर बेहतर रिटर्न देना है।

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गारंटेड प्लान रिस्क कम करने के लिए फिक्स्ड इनकम/डेट सिक्योरिटीज़ (डेट) पर ज़्यादा फोकस करते हैं, जबकि पार्टिसिपेटरी प्लान रिटर्न को ज़्यादा से ज़्यादा करने के लिए इक्विटी और डेट दोनों में इन्वेस्ट करते हैं।

NSE IPO और वैल्यू रिलीज़
शेयर न बेचने के कारण: NSE IPO एक OFS (ऑफिशियल पब्लिक ऑफरिंग) है। चूंकि दूसरे इन्वेस्टर भी हिस्सा ले रहे हैं और ज़रूरी कोटा पूरा हो गया है, इसलिए LIC ने अभी अपने शेयर बेचने से परहेज किया है।

NSE मार्केट का दबदबा: NSE देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज है, जिसका लगभग 80% इक्विटी मार्केट शेयर और 90% डेरिवेटिव मार्केट शेयर है।

पॉलिसीहोल्डर्स के लिए वैल्यू निकालना: NSE पर लिस्टिंग से LIC के पोर्टफोलियो में रखे NSE शेयरों की वैल्यू बुक वैल्यू से असल मार्केट वैल्यू पर शिफ्ट हो जाएगी, जिससे पॉलिसीहोल्डर्स के लिए वैल्यू निकलेगी।

भविष्य की स्ट्रैटेजी: LIC इसे एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट मानता है। शेयर तुरंत बेचने के बजाय, कंपनी ज़रूरत पड़ने पर या सही वैल्यूएशन/कीमत पर और मौके तलाश सकती है।

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