सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को देखते हुए नई कार के लिए 4 साल और बाइक के लिए 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया। जानिए नए नियमों से क्या बदल जाएगा।
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| कार और बाइक इंश्योरेंस के नए सुप्रीम कोर्ट आदेश का सांकेतिक पोस्टर, AI Image |
HighLights
इंश्योरेंस अवधि बढ़ी: नई प्राइवेट कार के लिए 4 साल और नई टू-व्हीलर (बाइक/स्कूटी) के लिए 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य।
बिना बीमा ऑटोमैटिक ई-चालान: ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाएगा, बिना वैध बीमा वाली गाड़ियों का कटेगा ई-चालान।
कड़े प्रस्तावों पर विचार: बिना वैध इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल/डीजल न देने संबंधी पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश।
Purvanchal News Print : सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI (इंस्पेक्टर जनरल इंश्योरेंस एजेंसी) को चार-टियर इंश्योरेंस सिस्टम लागू करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ी के इंश्योरेंस पर एक अहम फैसला सुनाया है।
अब, नई प्राइवेट कार खरीदने पर चार साल की थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी होगी। नई मोटरसाइकिल खरीदने पर छह साल की थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी होगी। पहले यह समय एक साल कम था। कोर्ट ने कहा कि इससे सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवज़ा मिलने में तेज़ी आएगी।
यह फैसला जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि देश में अभी भी बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं, और इसे रोकने की ज़रूरत है।
2018 के बाद भी हालात नहीं बदले
2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने नई कारों के लिए तीन साल की थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी और नई मोटरसाइकिलों के लिए पांच साल की थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी कर दी थी। हालांकि, हालात नहीं सुधरे हैं। कोर्ट ने कहा कि इन समय को अब एक साल बढ़ा दिया गया है।
IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे जनता पर बोझ बढ़ेगा। हालांकि, कोर्ट ने रोड सेफ्टी को ज़्यादा ज़रूरी माना।
हर दूसरी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं
कोर्ट ने कहा कि देश में लगभग 56% गाड़ियां बिना वैलिड इंश्योरेंस के चलती हैं। पार्लियामेंट्री कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 304.8 मिलियन रजिस्टर्ड गाड़ियों में से 165.4 मिलियन का वैलिड इंश्योरेंस नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ मुआवजा देना नहीं है; इसका मकसद पीड़ितों को लंबे कानूनी झगड़ों से बचाना भी है।
बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग
कोर्ट ने आदेश दिया कि ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के साथ इंटीग्रेट किया जाए। इससे बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों की पहचान होगी और ऑटोमैटिकली इलेक्ट्रॉनिक टिकट जारी होंगे।
राज्य पुलिस को भी इसी तरह के ऐप और मोबाइल डिवाइस दिए जाएंगे, जिससे मौके पर ही इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा।
बिना इंश्योरेंस के पेट्रोल नहीं
कोर्ट ने IRDAI और मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट को एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया। इस प्रोजेक्ट के तहत, बिना वैलिड इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक लगाने का प्लान बनाया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आम लोग किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकें। इसका भी इंतज़ाम किया जाना चाहिए।
इंश्योरेंस खरीदने से पहले पूरी जानकारी
कोर्ट ने IRDAI को चार-टियर इंश्योरेंस सिस्टम लागू करने का आदेश दिया। इसमें थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के साथ-साथ पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस, पैसेंजर इंश्योरेंस और पर्सनल डैमेज इंश्योरेंस शामिल होंगे। इंश्योरेंस खरीदने से पहले हर कस्टमर को आसान भाषा में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सिर्फ़ जानकारी के लिए है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि मार्केट में इन्वेस्टमेंट मार्केट रिस्क के अधीन हैं। इन्वेस्ट करने से पहले हमेशा एक्सपर्ट की सलाह लें। पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट यहां कभी भी किसी इन्वेस्टमेंट की सलाह नहीं देता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित मुआवजा दिलाने और बिना इंश्योरेंस सड़क पर दौड़ रहे लाखों वाहनों पर नकेल कसने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि इससे नई गाड़ी खरीदते समय शुरुआती लागत में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, लेकिन VAHAN पोर्टल और ANPR कैमरों के जरिए ई-चालान तथा बिना इंश्योरेंस फ्यूल न देने जैसे सख्त उपायों से सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।