Today Panchang In Hindi 2026, 14 August 2026 : आइए जानते हैं, इस दिन किस शुभ मुहूर्त में कार्य करने से आपको अवश्य सफलता मिलेगी, दिन का कौन सा समय आपके लिए अशुभ रहने वाला है। इस दौरान ग्रहों और नक्षत्रों की दशा क्या रहेगी है |
Today Panchang / पूर्वांचल न्यूज प्रिंट : आइए जानते हैं, इस दिन किस शुभ मुहूर्त में कार्य करने से आपको अवश्य सफलता मिलेगी, दिन का कौन सा समय आपके लिए अशुभ रहने वाला है। इस दौरान ग्रहों और नक्षत्रों की दशा क्या रहेगी है | शुक्रवार को द्वितीया तिथि शाम 6:48 PM तक रहेगी। परिघ योग 14 अगस्त को सुबह 9:29 AM तक रहेगा, जिसके बाद शिव योग शुरू होगा। चलिए, ज्योतिषचार्य पंडित धर्मेंद्र दीक्षित से जानें, विस्तार से पंचांग
14 अगस्त, 2026 का पंचांग: श्रावण शुक्ल द्वितीया को परिघ और शिव योग रहेगा। शुभ समय, राहुकाल और नक्षत्र के बारे में जानें।
14 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है और शुक्रवार है। शुक्रवार को द्वितीया तिथि शाम 6:48 PM तक रहेगी। परिघ योग 14 अगस्त को सुबह 9:29 AM तक रहेगा, जिसके बाद शिव योग शुरू होगा। इसके अलावा, शुक्रवार को सुबह 3:43 AM तक पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। तो चलिए आचार्य इंदु प्रकाश से शुक्रवार पंचांग, राहुकाल, शुभ समय और सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के बारे में जानते हैं।
14 अगस्त 2026 का पंचांग
शुक्ल पक्ष (श्रावण मास) की द्वितीया तिथि - 14 अगस्त 2026, शाम 6:48 बजे तक
परिघ योग - 14 अगस्त 2026 को सुबह 9:29 बजे तक परिघ योग रहेगा, जिसके बाद शिव योग शुरू होगा
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र - 14 अगस्त 2026, सुबह 3:43 बजे तक
14 अगस्त 2026 के लिए शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 4:49 बजे से सुबह 5:34 बजे तक
सुबह शाम - सुबह 5:12 बजे से सुबह 6:19 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 बजे से दोपहर 1:09 बजे तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 2:51 बजे से दोपहर 3:43 बजे तक
गोधुली मुहूर्त - शाम 7:08 बजे से शाम 7:30 बजे तक,शाम 7:08 बजे से रात 8:15 बजे तक
14 अगस्त, 2026 के लिए अशुभ समय
राहुकाल - दोपहर 2:19 बजे से दोपहर 3:55 बजे तक
यमगंड - सुबह 6:19 बजे से सुबह 7:55 बजे तक
आदल योग - सुबह 6:19 बजे से सुबह 4:38 बजे तक
विदाल योग - सुबह 4:38 बजे से सुबह 6:19 बजे तक
गुलिका काल - सुबह 9:31 बजे से सुबह 11:07 बजे तक
दुर्मुहूर्त - सुबह 10:35 बजे से सुबह 11:26 बजे तक
वर्ज्या - शाम 5:22 बजे से शाम 6:52 बजे तक
गंड मूल - सुबह 6:19 बजे से सुबह 4:38 बजे तक
बाण रोग - सुबह 5:09 बजे तक
राहुकाल का समय
दिल्ली - सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
मुंबई - सुबह 11:07 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक
चंडीगढ़ - 10:48 AM AM - 12:27 PM
लखनऊ - 10:32 AM - 12:11 PM
भोपाल - 10:47 AM - 12:25 PM
कोलकाता - 10:04 AM - 11:41 AM
अहमदाबाद - 11:07 AM - 12:44 PM
चेन्नई - 10:39 AM - 12:13 PM
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय - 4:48 AM
सूर्यास्त - 7:01 PM
शिव योग और परिघ योग
शिव योग में दुश्मन के खिलाफ किया गया कोई भी काम सफल होगा, मतलब दुश्मन पर जीत पक्की है। शिव योग की बात करें तो इस योग में किए गए सभी काम, खासकर मंत्रों का इस्तेमाल करने वाले काम सफल होंगे। वहीं, परिघ योग को सभी अच्छे कामों के लिए अशुभ माना जाता है। इसके असर से काम में रुकावटें या देरी हो सकती है।
आज का मंत्र (Mantra in Hindi)
मंत्र : 'ॐ शुक्र शुक्राय नमः ' विष्णु चालीसा ' का पाठ करें | मन्त्र का 108 बार जाप करें |
आज का शुभ रंग : सफेद
आज के पूज्य देवी: लक्ष्मी देवी व तुलसी जी की पूजा करें
आज का व्रत : शुक्रवार
कुछ उपाय - आज के दिन लक्ष्मी की पूजा व शाम को तुलसी जी की पूजा करें और घी का दीपक जलाएं। शुक्र ग्रह का बीज मंत्र की जाप लाभदायक होगा |
गुप्त मनोकामना की पूर्ति के जानें टोटके :- चांदी के लोटे या किसी भी चांदी के बर्तन में शुद्ध जल लेकर उसे पूजा स्थान में रख दें और सफेद चंदन की माला से 'ऊं सों सोमाय नम:' मंत्र की 11 माला जाप करें। फिर इस जल को पी लें। ऐसा लगातार 11 सोमवार करने से चंद्र ग्रह मजबूत हो जाएगा |
पंचांग के पांच अंग ये हैं
हिन्दू काल गणना के अनुसार 'चन्द्र रेखांक' को 'सूर्य रेखांक' से 12 अंश ऊपर जाने में जो समय बीतता है, वही तिथि कहलाती है। एक माह में तीस तिथियां होती हैं और ये तिथियां दो पक्षों में बंटी होती हैं। जहां शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा और जबकि कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है।
तिथि के नाम- प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या/पूर्णिमा तिथि होती है ।
नक्षत्र: आकाश मंडल में मौजूद एक तारा समूह को नक्षत्र कहा जाता है। इसमें 27 नक्षत्र होते हैं और नौ ग्रहों को इन नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त होता है। 27 नक्षत्रों के नाम- अश्विन नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, मृगशिरा नक्षत्र, आर्द्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र, मघा नक्षत्र,पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, घनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र। यह नक्षत्र क्रमवार नहीं लिखे गए हैं |
वार: वार का मतलब दिन से है। एक सप्ताह में सात दिन होते हैं। ये सात दिन ग्रहों के नाम पर रखे गए हैं - सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।
योग: नक्षत्र की भांति योग भी कुल 27 प्रकार के होते हैं। सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम इस प्रकार है - विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।
करण: एक तिथि में दो करण होते हैं। एक तिथि के पूर्वार्ध में और एक तिथि के उत्तरार्ध में। ऐसे में कुल 11 करण होते हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं - बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। विष्टि करण को भद्रा कहा जाता हैऔर भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं,मतलब अशुभ ।
( यह रिपोर्ट फेमस व चर्चित किताबों के अध्ययन व प्रकांड ज्योतिषीय विद्वानों से बातचीत पर आधारित है। यह लेख किसी तरह के दावा का समर्थन नहीं करता है। यह मात्र एक साधारण जानकारी है, जो आप को दी गई है )
