यूपी विधानसभा मानसून सत्र में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट पेश किया। सपा नेता शिवपाल यादव ने बजटीय प्रबंधन पर सवाल उठाए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट
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| यूपी विधानसभा मानसून सत्र के दौरान हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करते सपा विधायक और बजट भाषण |
पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट / लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को विधानसभा में भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली। एक ओर राज्य सरकार ने विकास कार्यों को गति देने और अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने शिक्षक भर्ती, आरक्षण में कथित धांधली और NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार हंगामा किया।
हंगामे के बीच सदन स्थगित
सत्र की शुरुआत होते ही समाजवादी पार्टी (सपा) समेत अन्य विपक्षी दलों के विधायक हाथों में तख्तियां लेकर सदन में पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। भारी हंगामे और अव्यवस्था के कारण पीठ ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12:20 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
विकास और ग्रामीण योजनाओं पर सरकार का फोकस
अनुपूरक बजट में सरकार ने अवस्थापना, औद्योगिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया है।
ग्राम्य विकास: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और विकास कार्यों के लिए ₹16,402.46 करोड़ की अनुपूरक मांग रखी गई है।
VB-ग्राम G: इस योजना के तहत ₹13,902.46 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
मनरेगा (MNREGA): मटीरियल आइटम के लिए अलग से ₹2,500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मांगा गया है।
इसके अलावा नए एक्सप्रेसवे, छात्राओं को मुफ्त स्कूटी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी फंड खर्च किया जाएगा।
अनुपूरक बजट नाकामी छिपाने का प्रयास: शिवपाल यादव
सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने अनुपूरक बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:
"जो सरकार अपने मूल बजट का 30 से 50 प्रतिशत हिस्सा भी ठीक से खर्च नहीं कर सकी, वह अनुपूरक बजट के जरिए अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। प्रदेश को अतिरिक्त बजट की नहीं, बल्कि ईमानदार नीयत और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता है।"
शिवपाल यादव ने अयोध्या के रामलला मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए भी सरकार की वित्तीय जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।
निष्कर्ष (Conclusion)
उत्तर प्रदेश का यह मानसून सत्र विकास के नए बजटीय आवंटन और तीखे राजनीतिक टकराव का गवाह बन रहा है। जहां एक तरफ सरकार अनुपूरक बजट के माध्यम से चुनावी व जनकल्याणकारी वादों और अधूरी परियोजनाओं को समय से पूरा करने का प्रयास कर रही है, वहीं विपक्ष रोजगार, पारदर्शी परीक्षाओं और वित्तीय प्रबंधन के मुद्दों पर सरकार को घेरकर आगामी रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश में है।



