आज का पंचांग 21 सितंबर 2026 हिंदी में पढ़ें। जानें सोमवार की दशमी तिथि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं आज का पंचांग, सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा का महत्व।
आज का पंचांग 21 सितंबर 2026
- दिन: सोमवार
- तारीख: 21 सितंबर 2026
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: दशमी, रात 8:00 बजे तक; इसके बाद एकादशी
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
- योग: शोभन, शाम 4:06 बजे तक
- करण: तैतिल के बाद गर
- चंद्र राशि: धनु से मकर
- सूर्य राशि: कन्या
आज सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
लखनऊ के लिए आज सूर्योदय सुबह 5:54 बजे और सूर्यास्त शाम 6:04 बजे के आसपास होगा। चंद्रोदय दोपहर लगभग 2:51 बजे रहने का अनुमान है।
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक परंपराओं में शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का विचार किया जाता है। लखनऊ के लिए आज के प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:20 से 5:07 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:35 से दोपहर 12:24 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:01 से 2:50 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:04 से 6:28 बजे तक
आज राहुकाल कब है?
सोमवार, 21 सितंबर को लखनऊ में राहुकाल सुबह 7:25 बजे से 8:57 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय नए शुभ कार्य शुरू करने से परहेज किया जाता है।
अन्य अशुभ समय:
- यमगंड: सुबह 10:28 से 11:59 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 1:30 से 3:02 बजे तक
सोमवार को भगवान शिव की पूजा का महत्व
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं और बेलपत्र, पुष्प तथा धूप-दीप से पूजा करते हैं।
भगवान शिव की आराधना के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप भी किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
आज का धार्मिक विशेष
आज भाद्रपद शुक्ल दशमी है। पंचांग में आज दशावतार व्रत का उल्लेख भी मिलता है। व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालु अपने क्षेत्र की परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार नियमों का पालन करें।
निष्कर्ष
आज 21 सितंबर 2026 को सोमवार, भाद्रपद शुक्ल दशमी, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और शोभन योग है। दशमी तिथि रात लगभग 8 बजे समाप्त होकर एकादशी में प्रवेश करेगी। पूजा-पाठ या किसी शुभ कार्य के लिए समय तय करते समय स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें।
डिस्क्लेमर: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। शुभ-अशुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
