आज अनंत चतुर्दशी पर जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय और आज की लकी राशियां।
आज 25 सितंबर 2026 को वाराणसी (काशी) के लिए वैदिक पंचांग के अनुसार मुख्य गणना इस प्रकार हैं:
सूर्योदय और सूर्यास्त (Varanasi Timings)
सूर्योदय: सुबह 05:48 AM
सूर्यास्त: शाम 05:51 PM
चंद्रोदय: शाम 05:03 PM
चंद्रास्त: अगले दिन सुबह 05:08 AM (26 सितंबर)
पंचांग के 5 मुख्य तिथि:
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:07 PM तक है, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी।
नक्षत्र: शतभिषा नक्षत्र सुबह 11:21 AM तक है, इसके बाद पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र शुरू होगा।
वार: शुक्रवार
योग: शूल योग दोपहर 02:49 PM तक है, उसके बाद गण्ड योग लगेगा।
करण: गर करण सुबह 11:17 AM तक, फिर वणिज करण रात 11:07 PM तक रहेगा।
आज का पर्व और विशेष अनंत चतुर्दशी:
आज भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का पावन दिन है।
गणेश विसर्जन: आज 10 दिनों से चल रहे गणेश उत्सव का समापन और बप्पा का विसर्जन किया जाएगा।
संवत्सर: विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी),
शक संवत 1948 (पराभव)।
राशि स्थिति: चंद्रमा आज कुंभ राशि में संचार कर रहे हैं।
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:25 AM से दोपहर 12:13 PM तक (दिन का सबसे शुभ समय)。
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:12 AM से 05:00 AM तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:51 PM से 02:39 PM तक。
अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)
राहुकाल: सुबह 10:19 AM से दोपहर 11:49 AM तक (इस समय शुभ या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए)।
गुलिक काल: सुबह 08:48 AM से 10:19 AM तक।
दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि जाना जरूरी हो, तो जौ या राई खाकर घर से निकलें।
अनंत चतुर्दशी पूजा का महामुहूर्तभगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र (14 गांठों वाला धागा) धारण करने का कुल समय आज दिनभर उपलब्ध है:
पूजा की कुल अवधि: सुबह 06:11 AM से रात 11:06 PM तक (करीब 16 घंटे 55 मिनट का लंबा समय)।
आज के विशेष शुभ चौघड़िया व अन्य मुहूर्त : यदि आप इस महामुहूर्त के भीतर भी सबसे श्रेष्ठ और विशेष चौघड़िया या विशिष्ट समय में पूजा करना चाहते हैं, तो इन समयों का चयन करें:
मुहूर्त का प्रकार समय (Varanasi/UP Local)महत्व लाभ चौघड़िया (उन्नति)सुबह 07:41 AM से 09:12 AM तककार्यों में उन्नति और समृद्धि के लिए।
अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ)दोपहर 11:48 AM से 12:37 PM तककिसी भी प्रकार के मांगलिक और मुख्य संकल्प के लिए।
विजय मुहूर्तदोपहर 02:13 PM से 03:01 PM तकइस समय की गई पूजा विजय और बाधाओं का नाश करती है।
गोधूलि मुहूर्त (शाम का समय)शाम 06:14 PM से 06:38 PM तकसंध्या वंदन और दीपदान के लिए सर्वोत्तम।
⚠️ इस समय पूजा करने से बचें
राहुकाल: आज सुबह 10:19 AM से दोपहर 11:49 AM तक रहेगा। इस डेढ़ घंटे के समय में मुख्य पूजा की शुरुआत करने या अनंत सूत्र बांधने से बचें।
विशेष सलाह: आप सुबह स्नान के बाद सबसे पहले लाभ चौघड़िया में या फिर दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में मुख्य रूप से भगवान सत्यनारायण/विष्णु जी की कथा सुनकर अनंत सूत्र धारण कर सकते हैं।
शास्त्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करने के नियम बेहद महत्वपूर्ण माने गए हैं। पुरुष और महिलाओं के लिए इसे बांधने के अलग-अलग नियम निर्धारित हैं:
पुरुषों के लिए नियम
- दाहिना हाथ: पुरुषों को अनंत सूत्र हमेशा अपने दाहिने (Right) हाथ की बाजू या कलाई पर बांधना चाहिए।
- महत्व: दाहिना भाग पुरुष ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
महिलाओं के लिए नियम
- बायां हाथ: महिलाओं (विवाहित या अविवाहित) को अनंत सूत्र हमेशा अपने बाएं (Left) हाथ की बाजू या कलाई पर धारण करना चाहिए।
- महत्व: शास्त्रों में स्त्री को पुरुष का वामांग (बायां हिस्सा) माना गया है, इसलिए बाएं हाथ में सूत्र बांधना शुभ होता है।
सूत्र बांधने के 4 अनिवार्य सामान्य नियम
- 14 गांठों का महत्व: इस सूत्र में लगी 14 गांठें भगवान विष्णु के बनाए 14 लोकों (भूर, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यः, अटल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल) का प्रतीक हैं। धागा बांधते समय प्रत्येक गांठ पर विष्णु जी के नामों का स्मरण करना चाहिए।
- पवित्रता का ध्यान: सूत्र धारण करने के बाद सूतक (परिवार में जन्म या मरण) या अपवित्र स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। यदि धागा अपवित्र हो जाए, तो उसे उतारकर नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए।
- मंत्र का जाप: अनंत धागा बांधते समय इस पौराणिक मंत्र का उच्चारण अवश्य करें:
"अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव। अनन्तरूपे विनियोजयस्व ह्यनन्तसूत्राय नमो नमस्ते॥"
- अवधि (कितने दिन रखें): इस सूत्र को कम से कम 14 दिनों तक हाथ में रखना अनिवार्य माना जाता है। कई लोग इसे पूरे एक वर्ष तक धारण करते हैं और अगले साल की अनंत चतुर्दशी पर पुराना धागा नदी में विसर्जित कर नया धागा बांधते हैं।
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भगवान विष्णु की कृपा और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली अनंत चतुर्दशी पूजा की संपूर्ण सामग्री सूची (Puja Samagri List) नीचे दी गई है।
मुख्य पूजा सामग्री (Core Items)
* अनंत सूत्र: 14 गांठों वाला रेशमी या सूती सूत (धागा)
* भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर: (शालिग्राम जी या सत्यनारायण भगवान की फोटो)
* चौकी: पूजा के लिए लकड़ी की साफ चौकी या पाटा
* कपड़ा: चौकी पर बिछाने के लिए पीले रंग का साफ कपड़ा
* कलश: तांबे या मिट्टी का कलश और ढक्कन
* नारियल: कलश स्थापना के लिए पानी वाला जटा नारियल
* पंचपल्लव: कलश में लगाने के लिए 5 आम के पत्ते or अशोक के पत्ते
अर्घ्य, स्नान और शुद्धि (Ritual Cleansing)
* गंगाजल और साफ जल
* पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण
* तुलसी दल: भगवान विष्णु की पूजा में सबसे अनिवार्य (तुलसी के पत्ते)
तिलक, सुगंध और चढ़ावा (Offering Items)
* रोली (कुमकुम) और पीला चंदन
* अक्षत: साफ और बिना टूटे हुए साबुत चावल
* अबीर, गुलाल और हल्दी
* मौली: (कलावा)
* इत्र: (सुगंधित तेल)
* जनेऊ: भगवान विष्णु के लिए एक जोड़ा
* दूर्वा: (दूब घास)
* फूल: पीले रंग के फूल और माला (गेंदे के फूल सबसे उत्तम)
धूप, दीप और नैवेद्य (Rituals & Food)
* देशी घी (गाय का घी) और रुई की बत्तियां
* दीपक: मिट्टी या पीतल का दीया
* धूपबत्ती और अगरबत्ती
* कपूर: आरती के लिए
* नैवेद्य (भोग): पंचमेवा, मौसमी फल (केला और सेब जरूर रखें)
* विशेष भोग: अनंत चतुर्दशी पर विशेष रूप से खीर या शीरा (सूजी का हलवा) का भोग लगाया जाता है।
* पान और सुपारी: 2 पीस पान के पत्ते (डंठल वाले) और 2 साबुत सुपारी
* लौंग और इलायची
* दक्षिणा: पूजा की पूर्णता के लिए कुछ सिक्के या नोट
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