कई बार माता-पिता स्वयं अधिक शिक्षित नहीं होते, इसलिए वे बच्चों की पढ़ाई में आवश्यक सहयोग नहीं कर पाते। बच्चा स्कूल जाता है, लेकिन घर पर पढ़ाई में मदद करने वाला कोई नहीं होता। धीरे-धीरे वह पढ़ाई में पीछे होने लगता है, उसका आत्मविश्वास कम होता है और शिक्षा उसके लिए कठिन लगने लगती है।
क्या है उनकी विवशता, जो वे अपने बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान नहीं दे पाते?
“माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान क्यों नहीं देते?”
लेकिन क्या हमने कभी यह समझने की कोशिश की है कि इसके पीछे की मजबूरी क्या है?
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़े, आगे बढ़े और एक बेहतर जीवन जिए। लेकिन ग्रामीण भारत में अनेक परिवारों के सामने गरीबी, सीमित आय, पारिवारिक जिम्मेदारियां, बच्चों से घरेलू या पारंपरिक कार्यों में सहयोग की अपेक्षा और शिक्षा के प्रति पर्याप्त जागरूकता का अभाव जैसी अनेक चुनौतियां हैं।
क्या ऐसे बच्चे को उसकी परिस्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित है?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक अथवा शैक्षिक रूप से वंचित एवं जरूरतमंद बच्चों को उनकी आवश्यकता, प्रतिभा और परिस्थितियों के अनुरूप *शैक्षिक मार्गदर्शन, प्रोत्साहन एवं आवश्यक सहयोग* उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में—
पढ़ाई के प्रति रुचि
सीखने की क्षमता
आत्मविश्वास
जीवन लक्ष्य के प्रति जागरूकता
रचनात्मक एवं शैक्षिक प्रतिभा
विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
हमारा विश्वास है—
“हर बच्चे को शिक्षा, सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।”
पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क
कार्यक्रम के लिए चयनित प्रतिभागियों को स्वर्गीय प्रेम शंकर सेवा संस्थान द्वारा निर्धारित नियमों एवं उपलब्ध संसाधनों के अंतर्गत *आवश्यकतानुसार शैक्षिक मार्गदर्शन एवं सहयोग* प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।
अधिकतम इंटर पास जो तैयारी करने के इच्छुक हो* आवश्यकतानुसार सहयोग प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, यह किसी निश्चित राशि अथवा प्रत्येक परिस्थिति में पूर्ण वित्तीय सहायता की गारंटी नहीं है। सहयोग का स्वरूप उपलब्ध संसाधनों और कार्यक्रम की आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
आप भी इस बदलाव का हिस्सा बनिए
शिक्षा की जिम्मेदारी केवल माता-पिता, स्कूल या सरकार की नहीं है।
यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
आप स्वर्गीय प्रेमशंकर मिश्र सेवा संस्थान से जुड़ सकते है।
बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
किताब-कॉपी एवं अध्ययन सामग्री में सहयोग कर सकते हैं।
स्वयंसेवक बनकर बच्चों के साथ समय दे सकते हैं।
माता-पिता को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर सकते हैं।
जरूरतमंद बच्चों की पहचान में सहयोग कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम की जानकारी अपने गांव और आसपास के परिवारों तक पहुंचा सकते हैं।
अपनी क्षमता के अनुसार शिक्षा सहयोग में योगदान दे सकते हैं।
किसी बच्चे की मजबूरी को उसकी मंजिल मत बनने दीजिए
- आपके लिए एक किताब छोटी चीज हो सकती है,
- लेकिन किसी बच्चे के लिए वही किताब उसके सपनों की शुरुआत हो सकती है।
- आपका एक घंटा किसी बच्चे की पढ़ाई की दिशा बदल सकता है।
- आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत कर सकता है।
आइए, एक बच्चे का थामें हाथ
एक घंटा समय दें।
एक किताब दें।
एक बच्चे को पढ़ाएं।
एक परिवार को जागरूक करें।
एक बच्चे के सपनों को उड़ान दें।
क्योंकि—
हर बच्चा पढ़ने का अधिकार रखता है।
हर बच्चे में प्रतिभा है।
“ हर बच्चे को शिक्षा, सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का अवसर ”
सपने सच करने के लिए स्वर्गीय प्रेम शंकर सेवा संस्थान द्वारा जनपद चंदौली के समस्त ग्रामीणों को खुला ऑफर है की पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद दूसरा मिश्रा परिवार जो चंदौली को देने के लिए व्याकुल है अब वह दे रहा है इसका लाभ उठाने की जरूरत है .

