Loan Against FD Rules: पैसों की है जरूरत तो भूलकर भी न तोड़ें FD! बैंक से तुरंत मिलेगा 95% तक लोन; जानें RBI के नए नियम

Loan Against FD Rules: पैसों की है जरूरत तो भूलकर भी न तोड़ें FD! बैंक से तुरंत मिलेगा 95% तक लोन; जानें RBI के नए नियम

Loan Against FD Interest Rate: एफडी तोड़ने के बजाय उस पर लोन या ओवरड्राफ्ट लेना क्यों फायदेमंद है? जानिए RBI के नियम और ब्याज दर का पूरा गणित।

एक सुरक्षित लॉकर और फिक्स्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट के साथ 'लोन अगेंस्ट एफडी' के 95% तक ओवरड्राफ्ट लोन नियमों को दर्शाता एक डिजिटल इन्फोग्राफिक चित्र।


पूर्वांचल न्यूज प्रिंट, पर्सनल फाइनेंस डेस्क: अचानक पैसों की जरूरत (Financial Emergency) पड़ने पर ज्यादातर लोग सबसे पहला काम अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को तोड़ने का करते हैं। लेकिन जैसा कि हमने पिछले अंक में गणना के साथ समझा था, मैच्योरिटी से पहले एफडी बंद करने पर भारी ब्याज का नुकसान उठाना पड़ता है।

इस वित्तीय नुकसान से बचने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और देश के बड़े व्यावसायिक बैंक एक बेहद शानदार सुविधा देते हैं, जिसे 'लोन अगेंस्ट एफडी' (Loan Against Fixed Deposit) या 'एफडी पर ओवरड्राफ्ट सुविधा' (OD Against FD) कहा जाता है। यह सुविधा आपको अपनी बचत को सुरक्षित रखते हुए बेहद कम ब्याज दर पर तुरंत पैसा मुहैया कराती है।

आइए जानते हैं कि बैंकों के लोन अगेंस्ट एफडी को लेकर क्या नियम हैं, आपको कितना पैसा मिल सकता है, और इसके मुख्य फायदे क्या हैं 

लोन अगेंस्ट एफडी (Loan Against FD) क्या है और यह कैसे काम करता है?

जब आप अपनी बैंक एफडी के बदले लोन लेते हैं, तो आपकी एफडी बैंक के पास एक सुरक्षा (Collateral) के रूप में गिरवी हो जाती है। इस सुविधा के तहत बैंक आपकी एफडी को चालू रखते हैं, यानी आपकी एफडी पर मिलने वाला मूल ब्याज लगातार बढ़ता रहता है। बैंक आपको दो तरह से फंड देते हैं: या तो आप एकमुश्त 'डिमांड लोन' (Demand Loan) ले सकते हैं या फिर अपनी जरूरत के अनुसार 'ओवरड्राफ्ट' (Overdraft) की सीमा सेट करवा सकते हैं।

📊 आपको कितना लोन मिल सकता है? 

(Borrowing Limits)रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, बैंकों के पास जमा आपकी एफडी के कुल मूल्य का एक बड़ा हिस्सा लोन के रूप में मिल जाता है

लोन की सीमा: देश के अधिकांश बैंक आपकी एफडी वैल्यू का 85% से लेकर 95% तक लोन या ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत करते हैं।

उदाहरण: यदि आपकी एफडी ₹5 लाख की है, तो बैंक आपको ₹4,25,000 से लेकर ₹4,75,000 तक का ओवरड्राफ्ट या लोन आसानी से दे सकते हैं।

अपवाद: ध्यान रहे कि 5 साल वाले टैक्स-सेवर एफडी (Tax-Saver FD) पर आप लोन नहीं ले सकते क्योंकि उनमें लॉक-इन पीरियड लागू होता है।

ब्याज दर का गणित: पर्सनल लोन से बहुत सस्ता

इस लोन की सबसे खास बात इसकी बेहद कम ब्याज दर है। बैंक आपसे आपकी एफडी पर मिलने वाले ब्याज से केवल 0.75% से 2% तक अधिक ब्याज वसूलते हैं।

प्रमुख बैंकों की वर्तमान ब्याज दरें (2026):

State Bank of India (SBI): आपकी एफडी दर से केवल 1% अधिक (जैसे एफडी पर 7.5% मिल रहा है, तो लोन पर 8.5% लगेगा)।

Punjab National Bank (PNB): एफडी दर से महज 0.75% अधिक।

HDFC Bank & ICICI Bank: एफडी दर से 2% अधिक।

चूंकि पर्सनल लोन की दरें आमतौर पर 11% से 18% के बीच होती हैं, इसलिए एफडी के बदले मिलने वाला यह लोन आपकी जेब पर बिल्कुल भारी नहीं पड़ता। सबसे अच्छी बात यह है कि ओवरड्राफ्ट में आप जितनी रकम इस्तेमाल करेंगे और जितने दिनों के लिए करेंगे, ब्याज केवल उतने पर ही देना होगा.
 
इस सुविधा के 5 सबसे बड़े फायदे (Key Benefits)

जीरो प्रोसेसिंग फीस (No Processing Charges): इस लोन के लिए बैंकों द्वारा कोई प्रोसेसिंग फीस या फाइल चार्ज नहीं लिया जाता।

कोई दस्तावेज नहीं (Minimal Paperwork): चूंकि आपका बैंक में पहले से ही पूर्ण KYC और एफडी उपलब्ध है, इसलिए यह प्रक्रिया बेहद आसान है। इसे आप YONO SBI या नेट बैंकिंग ऐप के जरिए चंद मिनटों में ऑनलाइन एक्टिवेट कर सकते हैं।

सिबिल स्कोर की जरूरत नहीं (No Credit Score Check): यदि आपका सिबिल (Credit Score) खराब भी है, तो भी बैंक इस लोन को देने से मना नहीं कर सकते क्योंकि आपकी एफडी ही बैंक के लिए सुरक्षा है।

फ्री-पेमेंट पर कोई पेनाल्टी नहीं: आप जब चाहें लोन की राशि चुका सकते हैं। समय से पहले पूरा लोन चुकाने पर कोई प्री-पेमेंट पेनाल्टी (Pre-payment Penalty) नहीं लगती।

रीपेमेंट की लचीली अवधि (Flexible Tenure): इस लोन को चुकाने की अधिकतम अवधि आपकी एफडी की बची हुई मैच्योरिटी अवधि के बराबर होती है।

लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

एफडी पर लॉक (Lien): जब तक आप बैंक का लोन या ओवरड्राफ्ट का पूरा पैसा ब्याज सहित वापस नहीं चुका देते, तब तक आप अपनी एफडी को बीच में बंद नहीं कर पाएंगे।

डिफ़ॉल्ट होने पर परिणाम: यदि आप एफडी की मैच्योरिटी अवधि खत्म होने तक लोन नहीं चुका पाते हैं, तो बैंक आपकी एफडी की राशि में से ही लोन की बकाया रकम को एडजस्ट (काट) कर लेगा और बची हुई रकम आपको लौटा देगा।

पूर्वांचल न्यूज प्रिंट की सलाह: अगर आपको सिर्फ कुछ महीनों या दिनों के लिए पैसों की तंगी है, तो व्यक्तिगत लोन लेने या अपनी मेहनत की एफडी को तोड़कर पेनाल्टी भरने के बजाय, इंटरनेट बैंकिंग ऐप में जाकर 'Overdraft against FD' का विकल्प चुनें। यह आपकी बचत भी बरकरार रखेगा और आपकी तत्काल जरूरत को भी सबसे सस्ते तरीके से पूरा करेगा।


 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या लोन लेने के बाद भी मेरी एफडी (FD) पर ब्याज मिलता रहेगा?
  • उत्तर: हाँ, बिल्कुल! लोन अगेंस्ट एफडी की सबसे बड़ी खासियत यही है कि लोन लेने के बाद भी आपकी मूल एफडी बैंक में सुरक्षित रहती है और उस पर तयशुदा ब्याज दर से रिटर्न लगातार बढ़ता रहता है. बैंक आपकी एफडी को सिर्फ एक गारंटी (Collateral) के रूप में लॉक करता है।
Q2. मैं अपनी एफडी (FD) पर अधिकतम कितना लोन या ओवरड्राफ्ट ले सकता हूँ?
  • उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, देश के अधिकांश बैंक आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट की कुल वैल्यू का 85% से लेकर 95% तक लोन या ओवरड्राफ्ट (OD) के रूप में स्वीकृत करते हैं. उदाहरण के लिए, ₹5 लाख की एफडी पर आपको ₹4.75 लाख तक का लोन आसानी से मिल सकता है।
Q3. लोन अगेंस्ट एफडी (Loan Against FD) पर बैंक कितना ब्याज वसूलते हैं?
  • उत्तर: यह पर्सनल लोन की तुलना में बेहद सस्ता होता है। बैंक आपकी एफडी पर मिलने वाले ब्याज से केवल 0.75% से 2% तक अधिक ब्याज लेते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आपकी एफडी पर 7.5% ब्याज मिल रहा है, तो लोन पर आपको केवल 8.5% या 9.5% ब्याज देना होगा।
Q4. क्या 5 साल वाली टैक्स-सेवर एफडी (Tax-Saver FD) पर भी लोन मिल सकता है?
  • उत्तर: नहीं, आयकर अधिनियम के नियमों के तहत 5 साल वाली टैक्स-सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा नहीं मिलती है. इन एफडी में 5 साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है, जिसे समय से पहले न तो तोड़ा जा सकता है और ना ही इसके बदले लोन लिया जा सकता है।

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