जनपद चंदौली के नई बाजार स्थित लकवा रोग को ठीक करने वाले चर्चित रहे डॉक्टर जलालुद्दीन की अचानक मृत्यु होने से लोग काफी परेशान दिखे।
- नम आंखों से हजारों ने दी डॉक्टर जलालुद्दीन को अंतिम विदाई
- डॉक्टर की अंतिम इच्छा अपने माता-पिता के बगल में ही कब्र बनाने की थी जिसको उनके पुत्रों ने पूरी की
- दवा का पर्चा लिखते समय ही गरीब मरीजों को पर्ची पर शून्य लिख दिया करते थे
चंदौली। जनपद चंदौली के नई बाजार स्थित लकवा रोग को ठीक करने वाले चर्चित रहे डॉक्टर जलालुद्दीन की अचानक मृत्यु होने से लोग काफी परेशान दिखे।डॉक्टर जलालुद्दीन रूहानी ताकतों के बल पर लकवा के मरीजों को बहुत ही आसानी से ठीक कर दिया करते थे।
इसके चलते बहुत दूर तक कई प्रात तक उनकी चर्चा होती थी। कम फीस पर मरीज को दवा दे देते थे।और जिस मरीज के पास पैसा नहीं रहता था उसके पर्ची पर दवा के साथ शून्य लिख दिया करते थे। दवा मिल जाती थी लेकिन पैसा देना नहीं पड़ता था। इस पद्धति से गरीब मरीजों का मनोबल इतना बड़ा हुआ था कि अचानक डॉक्टर के मृत्यु की खबर सुनकर उनके दरवाजे पर मुसलमान से ज्यादा कहीं हिंदुओं का जमावड़ा देखने को मिला।
हिंदुओं में पुरुषों से सबसे ज्यादा महिलाएं दरवाजे पर रो रही थी और चिल्ला कर कह रही थी की हे भगवान हमारे मसीहा को आपने अपने पास बुलाकर अच्छा नहीं किया। हम लोगों के बुरे दिनों में डॉक्टर साहब बड़ा उपकार किया करते थे।भगवान उनको अच्छी योनि में भेजने का काम करिएगा। और हम लोगों के लिए कोई दूसरा मसीहा भेजने का काम करेंगे।
निसंदेह दरवाजे पर जुटी हुई भीड़ यह बताने के लिए मजबूर कर रही थी की गरीबों का कोई काम नहीं रूकता था। रोते हुए लोग आते थे।उनके दरवाजे पर और हंसते हुए संतुष्ट होकर वहां से जाते थे। सबकी मदद करते थे।आज यह साबित करता है की मानवता सर्वोपरि है।
डॉक्टर जलालुद्दीन 10-15 दिनों से लखनऊ अस्पताल में भर्ती थे। अचानक उनकी बीपी डाउन हुई और डॉक्टरों ने अपने आप को असहाय महसूस किया और अंत में मृत्यु घोषित कर दी।पुत्रों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरी करते हुए अपने दादा दादी के बगल में कब्र खोद कर अपने मस्जिद के बगल वाले मकान में दफनाने का काम कर दिया। अदृश्य शक्तियों के बल पर दवा देने वाले डॉक्टर जलालुद्दीन अब अदृश्य शक्तियों के साथ हो गए।



