👉सरने-1 विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: बच्चों ने साझा किए 'मेरे सपने'
👉'बाल विवाह गलत है': बालिकाओं की शिक्षा और विकास में बाधाओं पर खुली चर्चा
👉कार्यक्रम में माताओं की विशेष भागीदारी: पॉक्सो (POCSO) एक्ट व कानूनी अधिकारों पर मंथन
👉प्रधानाध्यापिका नीतू सिंह व शिक्षिका नीलम तिवारी ने किया जागरूक, कई गणमान्य रहे उपस्थित
चंदौली ब्यूरो चीफ दिवाकर राय (पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट): जनपद चंदौली के नियामताबाद विकास खंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय सरने-1 में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के पावन अवसर पर एक विशेष और प्रेरणादायी संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में बच्चों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के संकल्प के साथ “मेरे सपने” और “बाल विवाह गलत है” विषयों पर विचारोत्तेजक गतिविधियां आयोजित की गईं।
बच्चों ने बयां किए अपने सपने और आकांक्षाएं
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में छात्र-छात्राओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित किया गया। बच्चों ने अपने उज्ज्वल भविष्य के लक्ष्यों, पढ़ाई और आकांक्षाओं को खुलकर साझा किया। किसी ने डॉक्टर, किसी ने शिक्षक तो किसी ने पुलिस अधिकारी बनकर देश सेवा करने का सपना जाहिर किया।
शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि लड़का और लड़की दोनों को समान रूप से शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को पूरा करने का हक है। लिंगभेद को दरकिनार कर बेटियों को आगे बढ़ने के समान अवसर देना ही इस दिवस की सच्ची सार्थकता है।
बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता और शिक्षा का महत्व
संवाद के दौरान बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई। बच्चों को बताया गया कि कम उम्र में विवाह से किस तरह एक बालिका की पढ़ाई, स्वास्थ्य, शारीरिक सुरक्षा और संपूर्ण मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। बालिकाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प पर जोर दिया गया ताकि वे समाज में सिर उठाकर जी सकें।
माताओं की रही विशेष भागीदारी: पॉक्सो (POCSO) एक्ट पर दी गई कानूनी जानकारी
इस जागरूकता कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इसमें बच्चों के साथ-साथ उनकी माताओं को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
माताओं को बालिकाओं की नियमित स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी परिस्थिति में कम उम्र में शादी न करने की शपथ दिलाई गई।
बच्चों की सुरक्षा के लिए बने सख्त कानून पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मुख्य प्रावधानों, बाल शोषण से बचाव और हेल्पलाइन नंबरों की विस्तृत जानकारी सरल भाषा में दी गई ताकि अभिभावक किसी भी असामान्य व्यवहार या संकट के प्रति सतर्क रह सकें।
सफल संचालन और गणमान्य जनों की उपस्थिति
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन शिक्षिका नीलम तिवारी द्वारा किया गया। वहीं विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नीतू सिंह ने अपने संबोधन में बच्चों और उपस्थित माताओं को अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर सुमन कुमारी, रश्मि, रीमा कुमारी, रज्जन, कल्लो, निर्मला, मीनाक्षी वर्मा, कौशल्या देवी सहित कई अभिभावक, रसोइया और ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में सभी ने बेटियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।



