चंदौली: चुनाव से पहले सुभासपा में बगावत, दर्जनों नेताओं ने दिया इस्तीफा

चंदौली: चुनाव से पहले सुभासपा में बगावत, दर्जनों नेताओं ने दिया इस्तीफा

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले चंदौली में ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा में बगावत। वाराणसी मंडल महासचिव दीपक राजभर व पदाधिकारियों ने छोड़ी पार्टी।

चंदौली जिला मुख्यालय पर सुभासपा से सामूहिक इस्तीफे का ऐलान करते वाराणसी मंडल युवा मोर्चा प्रमुख महासचिव दीपक राजभर व अन्य पदाधिकारी


  • विधानसभा चुनाव से पहले सुभासपा को बड़ा झटका: चंदौली में सामूहिक इस्तीफे का ऐलान
  • दीपक राजभर और बबलू राजभर के गंभीर आरोप: मूल सिद्धांतों व कार्यकर्ताओं की अनदेखी
  • सकलडीहा रैली से पहले फूटा आक्रोश: टिकट वितरण और बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल
  • राजभर समाज लेगा स्वतंत्र राजनीतिक निर्णय, पूर्वांचल की सियासत में हलचल तेज

चंदौली : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले चंदौली में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) में बगावत हो गई है, जिसमें दर्जनों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे का ऐलान किया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बीच, मंगलवार को राज्य के चंदौली जिले में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। विधानसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) में एक बड़ा विद्रोह हो गया।

ओम प्रकाश राजभर से नाखुश दर्जनों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के वाराणसी मंडल और यूथ विंग के महासचिव दीपक राजभर ने पार्टी प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश राजभर अपने मूल सिद्धांतों और मुद्दों से भटक गए हैं।

कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
दीपक राजभर ने आरोप लगाया कि पार्टी के लिए 20-24 साल काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि कम्युनिटी डेवलपमेंट के बजाय लीडरशिप डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जा रहा है।

इस्तीफा देने वालों ने 2027 के टिकट बंटवारे पर भी सवाल उठाए, आरोप लगाया कि राजभर समुदाय के वोटों का फायदा उठाया जा रहा है और टिकट शायद प्रभावशाली लोगों को दिए जा रहे हैं। नाम वापस लेने वाले उम्मीदवारों ने कहा कि राजभर समुदाय अब अपने अधिकार, हिस्सेदारी और सम्मान के आधार पर राजनीतिक फैसले लेगा। नेताओं ने दावा किया कि आने वाले दिनों में और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं।

बबलू राजभर ने सुधार की जरूरत पर चर्चा की

सुभासपा छोड़ने वालों में युवा मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि बबलू राजभर, वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं।। बबलू राजभर ने आरोप लगाया कि जिस समुदाय के सपोर्ट से ओम प्रकाश राजभर राजनीति के टॉप पर पहुंचे, उसी समुदाय के लोग आज भी घर, पानी, फुटपाथ और सड़क जैसी बेसिक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि गांव वालों की समस्याओं को लेकर कई पिटीशन फाइल की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने 16 तारीख को अंबेडकर नगर में ओम प्रकाश राजभर से ऑर्गनाइजेशन की कमजोर हालत और सुधार की जरूरत पर बात भी की थी, लेकिन उसके बाद उनसे दोबारा कॉन्टैक्ट नहीं किया गया।

राजभर पर मुख्य सिद्धांतों और मुद्दों से भटकने का आरोप
इस बीच, युवा मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि बबलू राजभर, वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर ने आरोप लगाया कि ओम प्रकाश राजभर अपने मुख्य सिद्धांतों और मुद्दों से भटक गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी राजभर समुदाय को विकास की मेनस्ट्रीम में जोड़ने के वादे के साथ बनाई गई थी, लेकिन आज पुराने वर्कर्स को नजरअंदाज किया जा रहा है।

दीपक राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि टिकट बांटने और असरदार लोगों को टिकट देने में मोलभाव हुआ। 2022 में SP-SBSP गठबंधन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि जब पार्टी को 16 सीटें मिली थीं  तो राजभर समुदाय के कितने लोगों को उम्मीदवार बनाया गया था। 

उन्होंने चिंता जताई कि 2027 में टिकट बंटवारे में भी ऐसी ही स्थिति हो सकती है। उन्होंने कहा कि राजभर समुदाय अब अपने अधिकार, हिस्सेदारी और सम्मान के आधार पर राजनीतिक फैसले लेगा। 

"और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं"
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए सालों तक फंड इकट्ठा किया, गांव-गांव जाकर प्रचार किया और संगठन को मजबूत किया, उन्हें लीडरशिप से मिलने तक का मौका नहीं दिया गया, जबकि प्रभावशाली लोगों को आसानी से फायदा पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने अपने समुदाय के बजाय खुद के विकास पर ज़्यादा ध्यान दिया।

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है, और आने वाले दिनों में और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं। फिलहाल, ओम प्रकाश राजभर या सुभासपा लीडरशिप की ओर से इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं आया है। यह देखना बाकी है कि पार्टी लीडरशिप इस नाराज़गी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाएगी।

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