चंदौली के समाजसेवी दुर्गेश सिंह ने आपात स्थिति में रक्तदान कर गर्भवती दलित महिला और नवजात की जान बचाई। बालिका शिक्षा व समाज सेवा के लिए प्रशासन कर चुका है सम्मानित।
![]() |
| समाजसेवी दुर्गेश सिंह ने रक्तदान कर बचाई जच्चा-बच्चा की जान |
खास बातें :-
रक्त की कमी से फंसी थी प्रसूता की जान, देवदूत बनकर पहुंचे समाजसेवी दुर्गेश सिंह
सदर मुख्यालय के निजी अस्पताल में सफल ऑपरेशन, जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित
गरीब बालिकाओं की शिक्षा और सामाजिक सरोकारों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं दुर्गेश सिंह
जिला प्रशासन कई मंचों पर सराह चुका है कार्य, परिजनों ने जताया आभार
चीफ ब्यूरो दिवाकर राय, चंदौली (पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट): "रक्तदान महादान है और यह किसी को नया जीवन दे सकता है"—इस कथन को चंदौली जनपद के जाने-माने समाजसेवी दुर्गेश सिंह ने धरातल पर सच कर दिखाया है। बुधवार को चंदौली मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही एक गरीब व असहाय गर्भवती दलित महिला के लिए दुर्गेश सिंह देवदूत बनकर सामने आए। उन्होंने तत्काल अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया, जिससे समय पर ऑपरेशन संपन्न हो सका और एक साथ जच्चा तथा बच्चा दोनों की जान बचाई जा सकी।
प्रसव पीड़ा और रक्त की भारी कमी, खतरे में थी दोनों जिंदगियां
घटनाक्रम के अनुसार, जिला मुख्यालय स्थित एक निजी चिकित्सालय में एक जरूरतमंद दलित महिला को गंभीर हालत में प्रसव (डिलीवरी) हेतु भर्ती कराया गया था।
चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद परिजनों को बताया कि महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन और रक्त का स्तर अत्यधिक कम है, जिसके चलते सामान्य प्रसव संभव नहीं है और तत्काल ऑपरेशन (सिजेरियन) करना अनिवार्य है।
ऑपरेशन के लिए आपातकालीन रक्त की सख्त आवश्यकता थी। आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय परिजन रक्त के प्रबंध के लिए इधर-उधर भटक रहे थे, लेकिन कहीं से भी रक्त का इंतजाम नहीं हो पा रहा था।
समय बीतने के साथ जच्चा और गर्भस्थ शिशु दोनों के जीवन पर गंभीर संकट मंडराने लगा था।
सूचना मिलते ही बिना देरी किए अस्पताल पहुंचे दुर्गेश सिंह
जब इस गंभीर स्थिति और गरीब परिवार की बेबसी की सूचना समाजसेवी दुर्गेश सिंह तक पहुंची, तो उन्होंने एक पल का भी विलंब नहीं किया।
दुर्गेश सिंह तुरंत निजी अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों से संपर्क कर स्वयं रक्तदान करने की इच्छा जताई।
मेडिकल जांच के उपरांत उन्होंने तत्काल एक यूनिट रक्तदान किया।
रक्त उपलब्ध होते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ऑपरेशन थिएटर में प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
संकट के समय में आगे आकर जीवनदान देने पर पीड़ित परिवार ने हाथ जोड़कर दुर्गेश सिंह का सहृदय आभार व्यक्त किया और उन्हें परिवार का रक्षक बताया।
बालिका शिक्षा और सामाजिक सेवा में सदैव अग्रणी
उल्लेखनीय है कि दुर्गेश सिंह जनपद चंदौली में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं:
वे पिछले लंबे समय से जनपद के सुदूर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में गरीब बालिकाओं की शिक्षा के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।
बालिकाओं को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने, फीस की व्यवस्था करने और उन्हें स्कूल से जोड़ने के अभियान में उनका योगदान हमेशा चर्चा में रहता है।
समाज सेवा, स्वास्थ्य सहायता और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और मानवीय कार्यों को देखते हुए जिला प्रशासन भी उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय व जनपदीय मंचों पर कई बार सम्मानित और प्रशस्ति पत्र देकर नवाज चुका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. समाजसेवी दुर्गेश सिंह ने कहाँ और किस परिस्थिति में रक्तदान किया?
चंदौली जिला मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती दलित महिला के शरीर में खून की अत्यधिक कमी हो गई थी और बिना खून के ऑपरेशन संभव नहीं था। सूचना मिलते ही दुर्गेश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया।
Q2. रक्तदान से किनकी जान बची?
समय पर रक्तदान होने से डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन किया, जिससे प्रसूता महिला और उसके नवजात शिशु (जच्चा-बच्चा दोनों) की जान सुरक्षित बच सकी।
Q3. समाजसेवी दुर्गेश सिंह मुख्य रूप से किस क्षेत्र में कार्य करते हैं?
दुर्गेश सिंह मुख्य रूप से जनपद चंदौली में गरीब और वंचित वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करते हैं।
Q4. क्या जिला प्रशासन द्वारा दुर्गेश सिंह को पूर्व में सम्मानित किया गया है?
हाँ, समाज सेवा और बालिका शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय एवं निरंतर मानवीय प्रयासों के लिए चंदौली जिला प्रशासन उन्हें कई अवसरों पर सम्मानित कर चुका है।
