👉अनसिक्योर्ड लोन की तेज रफ्तार पर RBI की लगाम: बैंकों और NBFCs को कड़े आदेश
👉जोखिम भार (Risk Weight) और अंडरराइटिंग मानकों में सख्ती के निर्देश
👉ग्राहकों की रीपेमेंट क्षमता और क्रेडिट हिस्ट्री की होगी गहन पड़ताल
👉डिफ़ॉल्ट और एनपीए (NPA) के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक का बड़ा कदम
बिजनेस डेस्क (पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) द्वारा धड़ल्ले से बांटे जा रहे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी वाले) कर्जों पर अपनी निगरानी बेहद सख्त कर दी है। खुदरा ऋण बाजार में लगातार बढ़ रहे जोखिम और संभावित गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की रोकथाम के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों के लिए नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
क्यों सख्त हुआ केंद्रीय बैंक?
हाल के वर्षों में डिजिटल लेंडिंग ऐप्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के जरिए पर्सनल लोन और कंज्यूमर क्रेडिट में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला है। बिना किसी ठोस जमानत या गारंटी के दिए जाने वाले इन कर्जों में कई मामलों में ग्राहकों की वास्तविक चुकौती क्षमता (Repayment Capacity) से अधिक ऋण स्वीकृत किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं।
रिजर्व बैंक का मानना है कि यदि इस अनियंत्रित क्रेडिट ग्रोथ पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो यह भविष्य में वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए प्रणालीगत जोखिम (Systemic Risk) खड़ा कर सकता है।
नए दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु
अंडरराइटिंग और पात्रता मानकों में सख्ती:
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल क्रेडिट स्कोर के सतही आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कर्जदार की वर्तमान आय, पूर्व ऋणों की देनदारी (Debt-to-Income Ratio) और रोजगार की स्थिरता का व्यापक मूल्यांकन करने के बाद ही लोन स्वीकृत करें।
ऋण सीमा और मल्टीपल लेंडिंग पर रोक:
एक ही ग्राहक द्वारा विभिन्न बैंकों और फिनटेक ऐप्स से एक साथ कई छोटे-छोटे पर्सनल लोन लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए डेटा शेयरिंग और रियल-टाइम क्रेडिट ब्यूरो वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है।
जोखिम भार (Risk Weights) का सख्त अनुपालन:
अनसिक्योर्ड कंज्यूमर लोन और क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो पर पहले से निर्धारित उच्च जोखिम भार और पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) के प्रावधानों की मासिक समीक्षा की जाएगी, ताकि बैंकों के पास संभावित डिफॉल्ट से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा चक्र मौजूद रहे।
वसूली एजेंटों और आचार संहिता पर नजर:
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि लोन की वसूली में किसी भी प्रकार की अनैतिक कार्यप्रणाली या ग्राहकों के उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डिजिटल लेंडर्स को स्पष्ट, पारदर्शी ब्याज दरें और सभी शुल्कों का विवरण अग्रिम रूप से उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
आम उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
रिजर्व बैंक के इस सख्त कदम का सीधा असर आम कर्जदारों पर देखने को मिलेगा:
लोन मंजूरी की प्रक्रिया होगी सख्त: बैंकों द्वारा अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग और सत्यापन के चलते पर्सनल लोन स्वीकृत होने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
कम क्रेडिट स्कोर वालों को झटका: जिन आवेदकों का क्रेडिट स्कोर कमजोर है या जिन पर पहले से कई ईएमआई चल रही हैं, उनके लिए नया असुरक्षित कर्ज पाना अब आसान नहीं होगा।
ब्याज दरों में स्थिरता का दबाव: बैंकों को ज्यादा जोखिम वाले प्रोफाइल पर ब्याज दरों को तार्किक और पारदर्शी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

