वाराणसी के नाटी इमली मैदान में 483 वर्ष पुरानी परंपरा के तहत विश्वप्रसिद्ध भरत मिलाप संपन्न। महज 3.36 मिनट के महामिलन के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु।
नाटी इमली के ऐतिहासिक मैदान में गूंजा 'हर-हर महादेव' और 'सियावर रामचंद्र की जय'
महज 3.36 मिनट का महामिलन, लेकिन 483 वर्षों की अटूट आस्था और अनुशासनसंत मेघा भगत द्वारा
शुरू की गई परंपरा: चित्रकूट रामलीला की अलौकिक मर्यादा
चारों भाइयों के गले मिलते ही भावविभोर हुए श्रद्धालु, पुष्पवर्षा से गूंजी काशी
वाराणसी : गुरुवार को दुनिया भर में मशहूर भरत मिलाप हुआ। इस दौरान, ऐतिहासिक नाटी इमली इलाके में "हर हर महादेव" और "सियावर रामचंद्र की जय" के नारे गूंजते रहे। बड़ी संख्या में भक्त जमा हुए, उनकी निगाहें चारों भाइयों के भव्य मिलन पर टिकी थीं।
रामलीला चित्रकूट कमेटी के एडमिनिस्ट्रेटर पंडित मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि काशी का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन 483 साल पुराना है। संत मेघा भगत द्वारा शुरू की गई यह परंपरा सदियों से उसी पवित्रता और गरिमा के साथ निभाई जाती रही है। हालांकि यह जमावड़ा सिर्फ़ 3.36 मिनट का था, लेकिन इसके पीछे का जोश और अनुशासन अनोखा था।
कहते हैं कि जैसे ही घड़ी में तय समय हुआ, भगवान श्री राम पुष्पक विमान के रूप में रथ से उतरे और अपने प्रिय भरत को गले लगा लिया। लीला देखने के लिए नाटी इमली से लेकर जैतपुरा और लोहटिया, मैदागिन तक भीड़ जमा हो गई। करीब पांच लाख भक्तों ने इसे देखा। पूरे 500 मीटर के परिसर में इतने भक्त जमा हो गए कि पैर रखने की जगह नहीं थी।

