Motivation Story In Hindi : राहुल उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा देने वाला एक साधारण छात्र था। गाँव के छोटे से घर में पढ़ाई करना आसान नहीं था। कभी बिजली चली जाती, कभी घर के काम आ जाते, तो कभी मन ही हार मानने लगता। किताब खोलते ही उसे लगता—“इतना सिलेबस कैसे याद होगा?”
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परीक्षा से एक दिन पहले राहुल बहुत घबराया हुआ था। उसने किताब बंद की और आँगन में बैठे अपने दादा जी के पास चला गया। दादा जी ने पूछा, “इतना परेशान क्यों है?” राहुल बोला, “दादा जी, मुझे लगता है मैं पास नहीं हो पाऊँगा।”
दादा जी मुस्कुराए और बोले, “जब मैं जवान था, तब खेत में हल चलाते-चलाते हाथ छिल जाते थे। कई बार लगा छोड़ दूँ, पर मैंने सोचा—अगर आज हार मान ली तो कल की फसल कैसी होगी? बेटा, मेहनत का फल आख़िरी घंटी बजने से पहले नहीं मिलता, बल्कि उसके बाद मिलता है।”
यह बात राहुल के दिल में उतर गई। उसने तय किया कि अब डर नहीं, सिर्फ़ मेहनत। अगले दिन परीक्षा हॉल में उसने गहरी साँस ली, प्रश्नपत्र पढ़ा और आत्मविश्वास से लिखना शुरू किया। उसे एहसास हुआ कि जो पढ़ा है, वही काफी है—बस भरोसा चाहिए।
कुछ महीनों बाद परिणाम आया—राहुल अच्छे अंकों से पास हो गया। उसने दादा जी के पैर छुए। दादा जी बोले, “देखा, आख़िरी घंटी के बाद ही असली जीत मिलती है।”
सीख: डर हमेशा परीक्षा से पहले आता है, लेकिन जीत हमेशा मेहनत और विश्वास के बाद मिलती है।

