मायावती ने अंबेडकर के जन्मदिवस पर केंद्र सरकार और विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधा। कहा कि- सत्ता में बैठी सामंती और जातिवादी सोच संविधान के पवित्र मकसद को नाकाम कर रही है।
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| BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती |
खास बातें :-
- सत्ता में बैठी जातिवादी सोच से संविधान के पवित्र मकसद हो रहे नाकाम
- सबके भले के लिए BSP सरकार का आना ज़रूरी है
- अंबेडकर ने दबे-कुचले लोगों को वोट देने का दिया अधिकार
पूर्वांचल न्यूज प्रिंट / लखनऊ। मंगलवार को डॉ. बी.आर. अंबेडकर के जन्मदिन पर BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार, BJP और दूसरी विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सामंती, जातिवादी और शोषक ताकतों के लगातार असर की वजह से बाबा साहेब का संविधान अपने पवित्र मकसद को पूरा नहीं कर पा रहा है।
इसी को सुलझाने के लिए डॉ. अंबेडकर की पार्टी की सरकार बनी। अंबेडकर, BSP की ज़रूरत देश और राज्य दोनों लेवल पर है, क्योंकि उनकी नीतियां और सिद्धांत "सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय" हैं।
BSP चीफ ने 9 मॉल एवेन्यू में अपने हेडक्वार्टर में डॉ. अंबेडकर की मूर्ति पर माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपने मैसेज में उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की वजह से ही समाज के पिछड़े तबकों को संविधान के तहत जीने और वोट देने का अधिकार मिला।
हालांकि केंद्र की कई पार्टियों की सरकारों ने उन्हें भारत रत्न देने के लिए लंबे समय तक नज़रअंदाज़ किया, लेकिन देश हमेशा बाबा साहेब का शुक्रगुजार रहेगा।
उन्होंने कहा कि BSP, अपने मौजूदा रूप में, "बहुजन समाज" की राजनीतिक ताकत के उभार को दिखाती है, जिसकी वजह से वीपी सिंह की मिली-जुली सरकार के दौरान बाबा साहेब को भारत रत्न मिला और मंडल कमीशन की सिफारिश के मुताबिक दूसरे पिछड़े ग्रुप्स के लिए पहला 27 परसेंट कोटा मिल पाया।
अगर उनके मानने वाले आज "बहुजन समाज" की सुरक्षा, सम्मान और विकास को महत्व देंगे, तभी जाति के आधार पर शोषण का यह बुरा सिलसिला रुकेगा। सरकार पर लोगों को रोज़ी-रोटी और इज्ज़तदार ज़िंदगी देकर उनकी भलाई करने की अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी पूरी करने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह काम सिर्फ़ अंबेडकरावादी पार्टी, BSP, सरकार में ही मुमकिन।

