उत्तर प्रदेश चंदौली जिले में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली और अभिभावकों को विशेष दुकानों से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
चंदौली : उत्तर प्रदेश चंदौली जिले में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली और अभिभावकों को विशेष दुकानों से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में बेसिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बावजूद यह सवाल जस का तस है कि आखिर इस पर स्थायी रोक कब लगेगी।
BSA की कार्रवाई, लेकिन असली मुद्दा अब भी बाकीकुछ दिनों पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने जिलाधिकारी के निर्देश पर अभियान चलाकर कई बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई की। इससे शिक्षा विभाग की सक्रियता जरूर दिखी, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ सतही कार्रवाई है।
असल समस्या उन निजी स्कूलों की है जो:
मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते हैं
अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करते हैं
हिंदी माध्यम की मान्यता पर “इंग्लिश मीडियम” के नाम पर स्कूल चला रहे हैं
“हिंदी मान्यता, इंग्लिश मीडियम का खेल”
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं जिनके पास केवल हिंदी माध्यम की मान्यता है, लेकिन वे खुद को “कन्वेंट” या “इंग्लिश मीडियम” स्कूल के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।
इन स्कूलों में:
- पढ़ाई का स्तर कमजोर बताया जा रहा है
- फीस अत्यधिक ली जा रही है
- फीस छूट के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है
वाराणसी मॉडल: कड़ा रुख, सख्त निर्देशसटे जिले वाराणसी में प्रशासन ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई है।जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने DIOS और BSA को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:मनमानी फीस वसूली पर सख्त कार्रवाई होपिछले तीन शैक्षणिक सत्रों की फीस का पूरा रिकॉर्ड लिया जाएकिसी भी स्कूल द्वारा विशेष दुकान से खरीदारी के लिए दबाव डालने पर कार्रवाई तय हो
इसके अलावा DIOS कार्यालय में कंट्रोल रूम (0542-2509413) भी बनाया गया है, जहां अभिभावक गोपनीय रूप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों को औचक निरीक्षण कर अभिभावकों से सीधे फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं।
चंदौली में क्यों नहीं दिख रही सख्ती?
चंदौली में अभी तक इस तरह की ठोस व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है। समाजसेवी और जन सूचना कार्यकर्ता दयाशंकर का कहना है:
“जन सूचना के तहत मिली जानकारी में यह सामने आया कि हिंदी मान्यता की आड़ में सबसे अधिक कन्वेंट स्कूल चल रहे हैं। शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
यह बयान प्रशासनिक निष्क्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
क्या कहते हैं नियम?
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार:
फीस वृद्धि निर्धारित मानकों के भीतर ही होनी चाहिए
अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है
अभिभावकों की मांग
जिले के अभिभावक मांग कर रहे हैं कि:
वाराणसी की तर्ज पर कंट्रोल रूम बनाया जाए
फीस संरचना पारदर्शी की जाए
स्कूलों की मान्यता और माध्यम की जांच हो
निष्कर्ष
चंदौली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि सख्त निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था से ही हल हो सकते हैं। जब तक निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लगती, तब तक अभिभावकों का आर्थिक शोषण जारी रहेगा।

