पूर्वांचल की बदहाली पर मौन सांसद-विधायक , अलग राज्य की मांग को लेकर 'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' ने खोला मोर्चा

पूर्वांचल की बदहाली पर मौन सांसद-विधायक , अलग राज्य की मांग को लेकर 'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' ने खोला मोर्चा

UP का पूर्वांचल क्षेत्र आज भी अपनी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। टूटी सड़कें, बदहाल अस्पताल, बेरोजगार युवा और गांवों से पलायन करते मजदूर इस क्षेत्र की नियति बन चुके हैं।

पूर्वांचल की बदहाली पर मौन सांसद-विधायक , अलग राज्य की मांग को लेकर 'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' ने खोला मोर्चा
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लखनऊ / वाराणसी : उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल क्षेत्र आज भी अपनी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। टूटी सड़कें, बदहाल अस्पताल, बेरोजगार युवा और गांवों से पलायन करते मजदूर इस क्षेत्र की नियति बन चुके हैं। लेकिन सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि जनता के वोटों से चुनकर संसद और विधानसभा पहुंचने वाले माननीय (सांसद और विधायक) इन समस्याओं पर आंखों पर काली पट्टी बांधकर बैठे हैं। 

पृथक पूर्वांचल राज्य के गठन को लेकर जनप्रतिनिधियों की इस खामोशी ने अब जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।इसी जन-आक्रोश को एक बड़ी आवाज देने के लिए 'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' के बैनर तले एक नए और बड़े संघर्ष का शंखनाद हो चुका है।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और जनता का बढ़ता दर्द

पूर्वांचल ने देश और प्रदेश को कई बड़े राजनेता दिए हैं, लेकिन विकास के मामले में यह क्षेत्र आज भी हाशिए पर है। चुनाव आते ही नेता विकास और अलग राज्य के वादे तो करते हैं, लेकिन आलीशान कुर्सियों पर बैठते ही वे जनता की आवाज से मुंह मोड़ लेते हैं।

पलायन का दंश: रोजगार के अभाव में हर साल लाखों युवा और मजदूर मुंबई, दिल्ली और गुजरात जैसे महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

स्वास्थ्य और शिक्षा का संकट: बंद पड़े अस्पताल और जर्जर स्कूल पूर्वांचल की प्रशासनिक उपेक्षा की गवाही दे रहे हैं।

सड़कों की बदहाली: गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

"अलग पूर्वांचल राज्य" ही एकमात्र समाधान: हरवंश पटेल
इस राजनीतिक उदासीनता के खिलाफ 'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' के कार्यकारी संयोजक हरवंश पटेल ने मोर्चा खोल दिया है। जनसभाओं के जरिए जनता को जागरूक करते हुए हरवंश पटेल ने सीधे तौर पर सत्ताधारियों को घेरा है।

मीडिया से बातचीत में हरवंश पटेल ने कहा कि "पूर्वांचल का विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक इसे एक अलग और स्वतंत्र राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता। हमारे नेता संसद भवन की चकाचौंध में पूर्वांचल की मिट्टी का कर्ज भूल चुके हैं। अब यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। जब तक हमें अलग पूर्वांचल राज्य नहीं मिलता, तब तक यह जनांदोलन और उग्र होगा।"

'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' बना जन-आंदोलन

हरवंश पटेल के नेतृत्व में इस आंदोलन को समाज के हर वर्ग—किसान, नौजवान, छात्र और मजदूरों का भारी समर्थन मिल रहा है। जनसभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ और हाथों में "अलग पूर्वांचल राज्य बनाओ" और "पूर्वांचल का हक दो" की तख्तियां इस बात का सबूत हैं कि अब जनता आर-पार के मूड में है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों और विधायकों ने पूर्वांचल की इस गूंज को अब भी अनसुना किया, तो आगामी चुनावों में उन्हें जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। 'पूर्वांचल राज्य जनांदोलन' ने यह साफ कर दिया है कि अब खोखले वादों से काम नहीं चलेगा, पूर्वांचल को उसका हक चाहिए।


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