सरकार आवारा मवेशियों की सुरक्षा और देखभाल पर लाखों-अरबों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन इन दावों के पीछे की सच्चाई बहुत खराब है।
- इन दावों के पीछे की सच्चाई बहुत खराब , यहां के हालात बदतर
पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट / गोंडा। सरकार आवारा मवेशियों की सुरक्षा और देखभाल पर लाखों-अरबों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन इन दावों के पीछे की सच्चाई बहुत खराब है। यहां के हालात बदतर हैं।
गौशाला अब आवारा गायों के लिए शेल्टर से ज़्यादा "कब्रिस्तान" जैसी दिखती है। गांववालों के मुताबिक, गौशाला में चारे, पानी और शेल्टर की सही सुविधाएं नहीं हैं। जानवर चिलचिलाती धूप में भूख और प्यास से परेशान हैं। कई गायें इतनी कमजोर हो गई हैं कि ठीक से खड़ी भी नहीं हो पातीं। बीमार जानवरों को खुले में छोड़ दिया जाता है।
अधिकारियों की लापरवाही और बेपरवाही की वजह से बेगुनाह जानवर तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर हैं। गांव के विकास अधिकारी राममूर्ति वर्मा ने बताया कि गौशाला में तीन-चार गायें लंबे समय से बीमार थीं और उनका इलाज जानवरों के डॉक्टर से करवाया जा रहा था।
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जानवरों के डॉक्टर डॉ. शिव प्रकाश मौर्य ने बताया कि गौशाला की रेगुलर जांच की जाती थी और बीमार जानवरों का इलाज किया जाता था, लेकिन उनकी हालत में उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं हुआ। सब-डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट नेहा मिश्रा ने बताया कि वीडियो और फोटो के आधार पर ऐसा लग रहा है कि गौशाला में मिसमैनेजमेंट है। तुरंत जांच कर कार्रवाई की जाएगी।


