चंदौली के नियामताबाद में आयोजित शिक्षकों की मासिक कार्यशाला में 10 प्रभावी शिक्षण रणनीतियों, 15 सूत्रीय कैच-अप गतिविधियों, निपुण लक्ष्य और पठन संस्कृति पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। बीईओ मनोज यादव ने शिक्षकों को अधिगम स्तर सुधारने के सुझाव दिए।

बीईओ मनोज यादव बोले- सार्थक शिक्षण रणनीतियों से बढ़ाएं बच्चों का अधिगम स्तर
पूर्वांचल न्यूज प्रिंट | चंदौली | 21 जुलाई 2026
जिले के नियामताबाद विकासखंड में मंगलवार को शिक्षकों की मासिक संकुल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के अधिगम स्तर (Learning Outcomes) को बेहतर बनाना, पठन संस्कृति को मजबूत करना तथा शिक्षकों को नई शिक्षण रणनीतियों से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) नियामताबाद मनोज यादव ने किया।
कार्यशाला की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद महानिदेशक, बेसिक शिक्षा के निर्देशानुसार निर्धारित एजेंडे पर विभिन्न विषय विशेषज्ञों एवं शिक्षक संकुलों ने शिक्षकों को विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
10 प्रभावी शिक्षण-अधिगम रणनीतियों पर हुआ प्रशिक्षण
कार्यक्रम में शिक्षक संकुल सुरेश चंद यादव ने कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 10 प्रभावी शिक्षण-अधिगम रणनीतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि शिक्षक बच्चों की सीखने की गति और उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गतिविधि आधारित शिक्षण अपनाते हैं, तो छात्रों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से कक्षा को रोचक, सहभागितापूर्ण और बाल-केंद्रित बनाने पर विशेष जोर दिया।
15 सूत्रीय कैच-अप गतिविधियों को अपनाने की अपील
शिक्षक संकुल नीलम तिवारी ने शिक्षकों को 15 सूत्रीय कैच-अप गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों का अधिगम स्तर अपेक्षित मानकों से पीछे है, उन्हें इन गतिविधियों के माध्यम से शीघ्र सीखने के स्तर तक लाया जा सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से इन गतिविधियों को नियमित रूप से विद्यालयों में लागू करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक छात्र को समान रूप से सीखने का अवसर मिल सके।
निपुण लक्ष्य और आकलन पर दी गई विस्तृत जानकारी
शिक्षक संकुल शशांक लाल ने कार्यशाला में निपुण तालिका, निपुण लक्ष्य और निपुण आकलन के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि समय-समय पर विद्यार्थियों का आकलन कर उनकी सीखने की प्रगति का मूल्यांकन करना आवश्यक है, जिससे शिक्षण पद्धति को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
बीईओ मनोज यादव बोले- पठन संस्कृति विकसित करना समय की आवश्यकता
कार्यशाला को संबोधित करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी मनोज यादव ने कहा कि शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बच्चों के अधिगम स्तर में सतत सुधार करना है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे नवीन शिक्षण रणनीतियों, गतिविधि आधारित शिक्षण और नियमित मूल्यांकन के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करें।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में पठन संस्कृति (Reading Culture) को मजबूत करने से विद्यार्थियों की भाषा, समझ और विश्लेषण क्षमता में सकारात्मक बदलाव आएगा, जिसका सीधा प्रभाव उनके शैक्षिक प्रदर्शन पर पड़ेगा।
शिक्षकों ने प्रस्तुत किए नवाचार
मासिक कार्यशाला में संकुल के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में किए जा रहे शैक्षिक नवाचारों (Innovative Teaching Practices) का प्रस्तुतीकरण किया। शिक्षकों ने बच्चों को सरल और रुचिकर तरीके से पढ़ाने के लिए अपनाई जा रही नई विधियों को साझा किया, जिन्हें अन्य शिक्षकों ने भी सराहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



