पूर्व IAS दिव्या मित्तल का वीडियो वायरल: इस्तीफा स्वीकार होने के बाद व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, राजनीति बदलने का किया एलान
खास बातें :-
- पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दिया और एक वीडियो में खुलासे किए।
- लहुरिया दह में स्कूल न बन पाने पर सिस्टम की नाकामी पर सवाल उठाए।
- रेवेन्यू डिपार्टमेंट के काम करने के तरीके और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताई।
पूर्वांचल न्यूज प्रिंट / मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में आजादी के 70 साल बाद पहाड़ी क्षेत्र के लहुरिया दह गांव में पानी पहुंचाने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर प्रशासनिक व्यवस्था और मौजूदा राजनीति पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। दिव्या मित्तल ने साफ किया है कि अब वह जनता की आवाज बनकर राजनीति की दिशा बदलने के लिए मैदान में उतर चुकी हैं।
लहुरिया दह में पानी लाने की मिली सजा, 9 महीने का काटा 'वनवास'
दिव्या मित्तल ने वीडियो में भावुक होते हुए कहा कि लहुरिया दह गांव के लोगों के चेहरों पर पानी पहुंचाकर खुशी तो आई, लेकिन इसका खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। मिर्जापुर से ट्रांसफर होने के बाद उन्हें लगभग 9 महीने तक वेटिंग (वनवास) में रहना पड़ा। व्यवस्था से इसी निराशा के चलते आखिरकार उन्होंने आईएएस पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
"3 साल बाद भी नहीं बना स्कूल, राजस्व विभाग में पन्नियों में लिपटा है अन्याय"
पूर्व आईएएस ने अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए प्रशासनिक लेटलतीफी और भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा:
- अधूरे वादे: लहुरिया दह में एक महिला ने पानी के बजाय बच्चों के लिए स्कूल मांगा था, क्योंकि वहां कक्षा 5 के बाद बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है। नियम-कानून के तहत मंजूरी मिलने के 3 साल बाद भी आज तक वहां स्कूल नहीं बन सका।
- राजस्व विभाग पर सवाल: जमीनों के पट्टे होने के बावजूद गरीब लोगों को उनका कब्जा नहीं दिया गया। लोग न्याय के लिए भटक रहे हैं और फाइलों (पन्नियों) में अन्याय दबा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर "ऊपर से" इन कामों को कौन रोकता है?
पेपर लीक, बेरोजगारी और AI के खतरे पर जताई चिंता
नौजवानों के भविष्य पर चिंता जताते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि आज बच्चे रात-रात भर जागकर पढ़ाई करते हैं, लेकिन पेपर लीक हो जाता है। पांच-पांच साल तक तैयारी करने के बाद भर्तियां अदालतों में लटक जाती हैं। माता-पिता गहने और जमीन बेचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरियां और कम होंगी, जिससे हर नौजवान डरा हुआ है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी भी सदन (संसद या विधानसभा) में इस गंभीर विषय पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
"सत्ता और शोर है पर सोच नहीं, अब राजनीति बदलनी होगी"
अपने भविष्य की योजना का खुलासा करते हुए दिव्या मित्तल ने कहा, "लोग मुझसे पूछते हैं कि तुम सब कुछ तो बन गई, अब क्या बनना चाहती हो? मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं जिनकी दफ्तरों में कोई पहुंच नहीं है और अगर पहुंच है भी, तो उनकी सुनी नहीं जाती। मुझे देश के 80 सालों का हिसाब चाहिए।"
उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की राजनीति में सत्ता है, शिलान्यास है और शोर है, लेकिन सोच नहीं है। उनका उद्देश्य केवल किसी राजनेता को बदलना नहीं, बल्कि इरादे, फिक्र और सोच की राजनीति की शुरुआत करना है।

