UPI पेमेंट पर कोई फीस नहीं
खास बातें :
कंज्यूमर्स के लिए UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे।
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने UPI फीस को लेकर स्थिति साफ की।
सरकार अब बैंकों को UPI सब्सिडी देना बंद कर रही है।
बिजनेस न्यूज़ , नई दिल्ली: डिजिटल पेमेंट करने वाले लाखों UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) यूजर्स के लिए एक जरूरी और राहत देने वाली खबर है। अगर आप दिन में कई बार QR कोड स्कैन करते हैं और ट्रांजैक्शन पर फीस लगने की चिंता में हैं, तो फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने स्थिति साफ की है। दूसरी ओर, बैंकों के लिए एक बुरी खबर है, क्योंकि सरकार जल्द ही UPI के लिए हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी खत्म कर सकती है।
रेगुलर कस्टमर्स के लिए कोई फीस नहीं
हाल ही में, फाइनेंस मिनिस्टर ने कन्फर्म किया कि UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) आम कंज्यूमर पर लागू नहीं होगा। UPI का इस्तेमाल करके पेमेंट करने पर कस्टमर्स से कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं ली जाएगी।
फाइनेंस मिनिस्टर के मुताबिक, यह मर्चेंट फीस भी बहुत मामूली (लगभग 0.4%) है। इसका मुख्य मकसद डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है, लेकिन आम कंज्यूमर से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह सुविधा आम लोगों के लिए पहले की तरह फ्री रहेगी।
मर्चेंट्स से 0.4% MDR चार्ज किया जाएगा
इसके तहत, मर्चेंट्स से ₹2,000 से ज़्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR चार्ज किया जाएगा, जबकि कंज्यूमर बिना किसी फीस के ट्रांजैक्शन करते रहेंगे। सरकार ने कहा कि इस नए सिस्टम से लगभग 96 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरकार बैंकों के लिए UPI सब्सिडी हटाएगी
भारत में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने RuPay डेबिट कार्ड और कम वैल्यू वाले UPI ट्रांजैक्शन पर "ज़ीरो MDR" नियम लागू किया है। इसका मतलब है कि मर्चेंट्स या कस्टमर्स से कोई फीस नहीं ली जाएगी। इससे बैंकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए, सरकार हर साल हज़ारों करोड़ रुपये (लगभग ₹3,500 करोड़) की सब्सिडी देती है।
UPI की पहुंच अब काफी बढ़ गई है। इस सिस्टम में अब "UPI पर क्रेडिट कार्ड" और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) जैसे फीचर्स शामिल हैं, जो MDR के अधीन हैं। इन नए फीचर्स से बैंकों को काफी रेवेन्यू मिला है। सरकार का मानना है कि देश में UPI इकोसिस्टम अब सेल्फ-सस्टेनिंग है। मर्चेंट फीस और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन से बैंकों को रेवेन्यू मिलने के साथ, उन्हें अब सरकारी सब्सिडी की ज़रूरत नहीं है।
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