बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को विपक्षी दलों के महागठबंधन (INDIA Alliance) ने निर्वाचन प्रणाली और वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट / पटना ब्यूरो। बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को विपक्षी दलों के महागठबंधन (INDIA Alliance) ने निर्वाचन प्रणाली और वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पूर्व आह्वान पर महागठबंधन के घटक दलों ने एकजुट होकर राजधानी में विशाल 'आक्रोश मार्च' निकाला। प्रदर्शनकारी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और पुतले फूंके।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर गंभीर आपत्तियां
विपक्षी दलों का मुख्य विरोध निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) कार्यक्रम और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के तौर-तरीकों को लेकर है। महागठबंधन नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया की आड़ में लक्षित तरीके से मतदाताओं के नाम काटने या हेरफेर करने की आशंका बनी हुई है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे पारदर्शी बनाने की मांग की।
तेजस्वी यादव के आह्वान पर जुटे घटक दल
उल्लेखनीय है कि इस राज्यव्यापी आंदोलन और मार्च की घोषणा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हाल ही में की थी। बुधवार को आयोजित इस आक्रोश मार्च में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और वामपंथी दलों (CPI, CPM, CPIML) सहित महागठबंधन के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी, विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी हाथों में पार्टी के झंडे, तख्तियां और बैनर लिए केंद्र सरकार व चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च करते हुए डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़े।
आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ हैं और चुनाव आयोग को किसी भी दबाव से मुक्त होकर पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मतदाता सूचियों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को ठीक नहीं किया गया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद नहीं छोड़ा, तो यह आंदोलन केवल पटना तक सीमित न रहकर पूरे राज्य के गांव-गांव और प्रखंड स्तर तक ले जाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशील चौराहों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

