- कलेक्ट्रेट पर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन: एडीएम मनीष चौहान को सौंपा 710 हस्ताक्षरों का ज्ञापन
- महामहिम राज्यपाल से निष्पक्ष कमेटी गठित कर प्राचार्य पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग
- एक सप्ताह का खुला अल्टीमेटम: मांगें पूरी न होने पर छात्र शुरू करेंगे आमरण अनशन
- 'प्राचार्य में हिम्मत है तो मुकदमा दर्ज कराएं': छात्र नेताओं ने साधा सीधा निशाना
- कैंपस में निशुल्क बायोमेट्रिक व्यवस्था और अवैध वसूली का पैसा वापस करने की मांग
चीफ ब्यूरो दिवाकर राय, गाजीपुर (पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट): स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पीजी कॉलेज), गाजीपुर में छात्रवृत्ति प्रक्रिया के तहत अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के नाम पर छात्र-छात्राओं से की जा रही खुली अवैध वसूली का मामला अब सीधे प्रशासनिक दहलीज पर पहुंच गया है। कॉलेज के मुख्य द्वार पर चले दो दिवसीय सफल हस्ताक्षर अभियान के उपरांत शुक्रवार (06 नवंबर 2026) को सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
छात्र नेताओं के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने 710 छात्र-छात्राओं के हस्ताक्षर से युक्त ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से कुलाधिपति/महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया। जिलाधिकारी की अन्य शासकीय व्यस्तता के चलते यह पत्रक अपर जिलाधिकारी (ADM) मनीष चौहान को सौंपा गया। साथ ही जिलाधिकारी के नाम भी एक कठोर मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस संस्थागत भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र आमरण अनशन और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
कलेक्ट्रेट में गूंजे नारे: 'सफेद झूठ बोल रहे हैं प्राचार्य, हिम्मत है तो मुकदमा कराएं'
ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्र नेताओं ने कॉलेज प्राचार्य के हालिया बयानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्हें जमकर घेरा:
दीपक उपाध्याय (पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष): "प्राचार्य का यह बयान हास्यास्पद और सफेद झूठ है कि कॉलेज में कोई वसूली नहीं हो रही। यदि छात्रों का आरोप गलत है और कोई लूट नहीं हुई, तो प्राचार्य अपनी फर्जी शालीनता छोड़कर छात्रों पर मुकदमा दर्ज कराएं। अपनी गर्दन और कारनामों को बचाने के लिए मीडिया में भ्रामक बयानबाजी कर वे शिक्षक पद की गरिमा गिरा रहे हैं।"
आकाश चौधरी (छात्र नेता): "शिक्षकों की आड़ में दलाली का खेल अब और नहीं चलेगा। पिछले सत्र में कैंपस के अंदर लिखित नोटिस चिपकाकर प्रति छात्र रुपये वसूले गए और इस बार बचने के लिए निजी साइबर कैफे व दुकानों पर धंधा चलाया जा रहा है। प्राचार्य या तो इस अवैध कारोबार पर तुरंत रोक लगाएं या खुली बहस में आएं।"
प्रद्युम्न सिंह यादव 'राजन' (छात्र नेता): "कॉलेज प्रशासन कितना भी झूठ का जाल बुन ले, लेकिन 710 छात्रों के हस्ताक्षर इस बात के अकाट्य प्रमाण हैं कि बड़े पैमाने पर आर्थिक उत्पीड़न हुआ है। छात्र अन्याय के खिलाफ एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।"
निलेश बिंद व विकास यादव (छात्र नेता): "यह सीधे तौर पर छात्रों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न है। कॉलेज प्रशासन छात्रों की जेब पर डाका डालना बंद करे। अगर सात दिनों के भीतर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो छात्र सड़क पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।"
छात्रों की 3 प्रमुख मांगें और आगामी रणनीति
उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कमेटी: महामहिम राज्यपाल एवं जिलाधिकारी तत्काल संज्ञान लेकर एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करें, जो छात्रों से सीधा संवाद कर साक्ष्य संकलित करे और दोषी प्राचार्य व कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
7 दिनों का अल्टीमेटम व आमरण अनशन: एक सप्ताह के भीतर अवैध वसूली को पूरी तरह बंद किया जाए, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शत-प्रतिशत निशुल्क घोषित हो और अब तक जिन छात्रों से अवैध रूप से धन वसूला गया है, उनका एक-एक पैसा वापस कराया जाए। समयसीमा बीतने पर छात्र कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन पर बैठेंगे।
परिसर में निशुल्क व्यवस्था: निजी दुकानों पर छात्रों को धकेलने के बजाय कॉलेज परिसर के अंदर ही तकनीकी संसाधन स्थापित कर पारदर्शी और सुगम बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की जाए।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र रहे उपस्थित
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय, प्रद्युम्न सिंह यादव 'राजन', आकाश चौधरी, निलेश बिन्द, विकास यादव, अंकित भारद्वाज, विवेक, अखिलेश, पवन, मोहित, अभिमन्यु विश्वकर्मा, अंकित, ऋतिक, सोनू यादव, बागी, विवेक यादव, अमन सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. गाजीपुर पीजी कॉलेज के छात्रों ने कलेक्ट्रेट में किसे ज्ञापन सौंपा?
जिलाधिकारी की व्यस्तता के कारण छात्रों ने अपर जिलाधिकारी (ADM) मनीष चौहान को 710 छात्रों के हस्ताक्षर से युक्त ज्ञापन सौंपा, जिसे महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया गया है।
Q2. छात्र नेताओं ने प्रशासन को क्या समयसीमा (अल्टीमेटम) दी है?
छात्रों ने प्रशासन को 7 दिन (एक सप्ताह) का अल्टीमेटम दिया है। यदि निर्धारित समय में जांच व कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र आमरण अनशन शुरू करेंगे।
Q3. छात्रवृत्ति बायोमेट्रिक को लेकर छात्रों का मुख्य आरोप क्या है?
छात्रों का आरोप है कि सरकारी स्तर पर निशुल्क होने के बावजूद कॉलेज प्रशासन निजी दुकानों से सांठगांठ कर विद्यार्थियों से ₹70 से ₹100 तक की अवैध वसूली करवा रहा है।
Q4. ज्ञापन में छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रमुख मांगों में प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, कॉलेज कैंपस के भीतर निशुल्क बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करना और अवैध रूप से वसूले गए पैसे को छात्रों को वापस लौटाना शामिल है।


