ग्लोबल बाजारों में बढ़ती बांड यील्ड के असर से भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सत्र बिकवाली। सपाट शुरुआत के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट।
खास बातें :-
किन सेक्टर्स में दिखा सबसे ज्यादा नुकसान और निवेशकों के लिए क्या है सलाह
वैश्विक बांड यील्ड में तेजी का असर: लगातार दूसरे सत्र में फिसला शेयर बाजार
ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली (पूर्वांचल न्यूज़ प्रिंट): वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी व वैश्विक बांड यील्ड में लगातार दर्ज की जा रही बढ़ोतरी के कारण भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भारी दबाव देखने को मिला। घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) की शुरुआत मिले-जुले रुख के साथ सपाट हुई, लेकिन शुरुआती कारोबार के कुछ ही मिनटों के भीतर चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार लाल निशान में फिसल गया।
सपाट शुरुआत के बाद हावी हुई बिकवाली
कारोबारी सत्र के आरंभ में बाजार में ठहराव के संकेत दिखे थे, लेकिन जैसे ही वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सतर्कता का असर गहराया, बिकवाली तेज हो गई। बैंकिंग, आईटी और रियल्टी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली हावी होने से सूचकांक तेजी से निचले स्तरों पर आ गए।
क्यों गिर रहा है बाजार?
1. बांड यील्ड में लगातार वृद्धि: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सरकारी बांड यील्ड बढ़ने से इक्विटी बाजारों का आकर्षण घटता है। निवेशक जोखिम भरे इक्विटी एसेट्स से पूंजी निकालकर सुरक्षित सरकारी बांड्स की ओर रुख करते हैं।
2. कमजोर वैश्विक संकेत: अमेरिकी और एशियाई बाजारों में मंदी की आशंका और ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च बने रहने की चिंताओं ने विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
3.विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: बांड यील्ड मजबूत होने के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उभरते बाजारों से नकदी निकालने की रणनीति अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बांड यील्ड में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के रुख को लेकर स्पष्टता नहीं बनती, तब तक घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है।

